दो एक्सपायर दवाएं दी; स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे की आशंका
दैनिक सम्राट संवाददाता
जमवारामगढ़ (अंकिता शर्मा)। उप जिला अस्पताल जमवारामगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शुक्रवार को एक मरीज को इलाज के दौरान एक्सपायरी दवाइयां दिए जाने का मामला सामने आया है, जिसने न केवल अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली बल्कि दवा वितरण व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है।
हालांकि अस्पताल प्रशासन ने अवधिपार दवाइयां नही देने का दावा किया है। जमवारामगढ़ कस्बा के रैगर मौहल्ला निवासी भूपेंद्र वर्मा अपनी पत्नी सुमन को दांत दर्द की शिकायत होने पर उप जिला अस्पताल में दंत चिकित्सक डॉ. देवेंद्र शर्मा को दिखाने पहुंचे। डॉक्टर ने आवश्यक दवाइयां पर्ची पर लिखी गईं, लेकिन अस्पताल के केमिस्ट काउंटर से दवाइयां लेते समय बड़ी लापरवाही सामने आई।
बताया गया कि कुल 6 दवाइयों में से 3 दवाइयां सही दी गईं, जबकि एक दवा को अनुपलब्ध बताया गया। वहीं 2 दवाइयां—मेट्रोनिडाजोल आईपी 400 एमजी एवं लेक्टिक एसिड बेसिलस टैबलेट—एक्सपायरी डेट की थमा दी गईं। दोनों दवाइयों पर एक्सपायरी डेट नवंबर 2025 अंकित है, जो स्पष्ट रूप से समाप्त हो चुकी थी। अवधिपार दवाइयां देने पर मरीज के पति ने विरोध किया।इधर, अस्पताल प्रशासन
ने दावा किया है कि अवधिपार दवाइयां नही दी गयी है। जबकि दवा निर्माण वर्ष दिसम्बर 2024 व अवधि नवम्बर 2025 लिखी हुयी है। जो साबित करता है कि दवा अवधिपार है।
स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक?: विशेषज्ञों के अनुसार एक्सपायरी दवाइयों का सेवन करना मरीज के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसी दवाइयाँ या तो अपना असर खो देती हैं या शरीर पर विपरीत प्रभाव डाल सकती हैं। खासकर संक्रमण से जुड़ी दवाइयां यदि एक्सपायर हो चुकी हों तो रोग ठीक होने के बजाय बढ़ सकता है, जिससे स्थिति और जटिल हो सकती है।
व्यवस्था पर उठे सवाल: यह घटना न केवल मरीज की सेहत के साथ खिलवाड़ है, बल्कि अस्पताल में दवाइयों की गुणवत्ता जांच, स्टॉक प्रबंधन और वितरण प्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में दवाइयों की उपलब्धता और गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन सुधार के ठोस प्रयास नजर नहीं आए।
कार्रवाई की मांग: मामले के सामने आने के बाद अब जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की लापरवाही पर रोक नहीं लगी तो यह किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से भी अपेक्षा की जा रही है कि वे इस प्रकरण का संज्ञान लेकर जांच करवाएं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में मरीजों की जान से इस तरह का खिलवाड़ न हो।
इनका कहना है
दवा अवधिपार नही है। रैपर पर एक्सपायरी डेट सही तरीके से नही दिखने के कारण गलतफहमी हुयी है। स्टॉक की जांच कर ली है।
-डॉ.मातादीन मीना, पीएमओ उप जिला अस्पताल जमवारामगढ़