अनूठी गौ सेवा: दनाऊ कला निवासी गरूड़ पुराण कथा वाचक ने 13 साल में कथा से कमाए 84 लाख रुपए, गायों के लिए दान कर दिए, खुद ने नही रखा एक रुपया भी
दैनिक सम्राट संवाददाता
देवगांव (अमित नाटाणी)। कोई व्यक्ति पैसा कमाकर खुश है तो कोई व्यक्ति पैसा कमाकर दान देकर खुश है ऐसा ही बारह वर्षो तक गरुड़ पुराण कथा वाचन से प्राप्त 84 लाख दान दक्षिणा की राशि को दनाऊ कला निवासी रमेश चन्द्र शास्त्री ने गोसेवा के लिए अर्पित कर दिया है जिसे अब क्षेत्र में अद्भुत अकल्पनीय कार्य से देखा जा रहा है।रमेश शास्त्री खुद तो अपने आप मे गोमाता के लिए पूर्ण रूप से समर्पित है वही भक्तो को भी प्रेरित करने के कार्य मे पीछे नही है।
यही वजह है शास्त्री वर्ष 2012 से वर्ष 2025 तक 84 लाख रुपये तो नकद और करीब 28 लाख रुपये का पशु चारा व आहार गौशाला को समर्पित कर कर चुके है।
कथा के दौरान यजमान सेप्राप्त हुई राशि की कामधेनु गौशाला की रसीद भी दी जाती है।इस राशि से गायो के चारे पानी की व्यवस्था की जाती है जबकि कथा के दौरान हुई आय हर वर्ष गोपाष्टमी के दिन आयोजित कथा में वर्ष भर में प्राप्त राशि को श्रद्धालुओं के समक्ष कामधेनु गौशाला को समर्पित कर दी जाती है।
व्यास पीठ से गोमाता की महिमा,श्रद्धालु देते है बढ़ चढक़र दान: कथा वाचक रमेश शास्त्री जब कथा करने जाते है तो व्यास पीठ से लोगो को गोमाता की महिमा के बारे में बताते हुए प्रेरित करते है कि गोमाता का दूध,घी व गोमूत्र से लेकर गोबर तक आपके जीवन मे कितना काम आता है।उनके इसी निस्वार्थ सेवा भाव एवं गोभक्ति को देखते हुए श्रद्धालु दिल खोलकर कथा में दान देते है।उनकी इसी कथा से प्रेरित होकर एक ग्रामीण ने तो अपनी 3 बीघा उपजाऊ जमीन गौशाला को दान दे थी।गौशाला के संस्थापक सदस्य शिवशंकर प्रजापति ने बताया कि गौशाला के सबसे बड़े दानदाता रमेश शास्त्री ही है, जिन्होंने ग्रामीणों को व गौशाला संचालकों द्वारा आग्रह करने के बावजूद भी गौशाला की कार्यकारिणी में कोई पद नही लिया उन्होंने केवल सेवा भाव को ही प्राथमिकता दी।
महादेवपुरा गौशाला में सालाना दान 65 लाख: गौशाला के कोषाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण बैरवा ने बताया कि रमेश शास्त्री द्वारा कथा से एकत्र चढ़ावे को गौशाला में समर्पित कर देना एक अनूठा कार्य है इस तरह के लोग बहुत कम देखने को मिलते है जो अपनी जेब से गाडी में तेल खर्च कर कथा करने जाते है कथा के पूरे चढ़ावे को गौमाता के लिए समर्पित कर देते है। बैरवा ने यह भी बताया कि वर्ष 2011 में गौशाला में 14300 रुपए के दान से शुरुआत हुई थी जो अब वर्तमान में सालाना 65 लाख रुपए दान आ रहा है।
