नई दिल्ली। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता फिलहाल बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि बातचीत के दौरान उनकी टीम लगातार राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के संपर्क में थी।
वेंस ने कहा कि पिछले 21 घंटों में उन्होंने ट्रंप से कई बार बात की। उन्होंने कहा, "हम लगातार राष्ट्रपति से बात कर रहे थे, करीब आधा दर्जन या एक दर्जन बार बातचीत हुई।"
इसके अलावा वे रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और सेंटकॉम प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर से भी लगातार संपर्क में थे। उन्होंने कहा कि अमेरिका पूरी ईमानदारी से बातचीत कर रहा था और एक अंतिम प्रस्ताव भी रखा गया, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी।
परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद
जेडी वेंस ने बताया कि बातचीत टूटने की सबसे बड़ी वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा। अमेरिका ने इसे अपनी 'रेड लाइन' बताया और साफ कहा कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) बंद करना होगा।
वेंस के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान साफ तौर पर यह भरोसा दे कि वह कभी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि यही राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का मुख्य लक्ष्य है। वहीं, ईरान ने अमेरिका की मांगों को अव्यवहारिक बताया और कहा कि उसका परमाणु कार्यक्रम किसी बम बनाने के लिए नहीं है।
ईरान ने अमेरिका पर लगाया आरोप
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने वार्ता टूटने के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार था, लेकिन उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है।
गालिबाफ ने कहा कि ईरानी पक्ष ने सकारात्मक प्रस्ताव दिए, लेकिन अमेरिकी पक्ष भरोसा जीतने में नाकाम रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि अब अमेरिका को तय करना है कि वह भरोसा कायम कर सकता है या नहीं।
बिना नतीजे खत्म हुई बातचीत
ईरान के एक राजनयिक बयान में भी कहा गया कि बातचीत अब खत्म हो चुकी है और कोई समझौता नहीं हो पाया है। साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी बंद है।