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11 अप्रैल 2026
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मातृशक्ति जन गोष्ठी में संस्कार, स्वदेशी ओर परिवार व्यवस्था पर जोर

मातृशक्ति जन गोष्ठी में संस्कार, स्वदेशी ओर परिवार व्यवस्था पर जोर
मातृशक्ति जन गोष्ठी में संस्कार, स्वदेशी ओर परिवार व्यवस्था पर जोर

दैनिक सम्राट संवाददाता
कोटा (ओमप्रकाश जगरोटिया)।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोटा महानगर द्वारा मातृशक्ति प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन तलवंडी स्थित राजकीय आयुर्वेदिक योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में समाज जीवन में मातृशक्ति की भूमिका, पारिवारिक मूल्यों और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता भगवती प्रसाद रहे, जो पेसिफिक यूनिवर्सिटी उदयपुर के कुलगुरु एवं अखिल भारतीय स्वदेशी जागरण संयोजक हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विश्विद्यालय कोटा कुलगुरु विमला ने की। इस अवसर पर संघ के कोटा महानगर संघ चालक गोपाल लाल गर्ग भी मंच पर उपस्थित रहे।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विमला ने अहिल्याबाई होल्कर के नेतृत्व और रानी लक्ष्मी बाई के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जैसे जीजाबाई ने छत्रपति शिवाजी महाराज का निर्माण किया, उसी प्रकार माताओं को बच्चों को संस्कारवान बनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए तथा उन्हें मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से दूर रखना चाहिए।
मुख्य वक्ता भगवती प्रसाद ने कहा कि मातृशक्ति का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। उन्होंने जीजाबाई, अहिल्याबाई और अन्य उदाहरणों के माध्यम से बताया कि महिलाओं ने सदैव समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने ऋग्वेद काल के उदाहरणों से उस समय की विदुषी महिलाओं की क्षमता को रेखांकित किया।
उन्होंने परिवार व्यवस्था को भारत की सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए कहा कि पति-पत्नी का संबंध विश्वास और समर्पण पर आधारित होता है। आधुनिक समय में बढ़ती तलाक की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने मीडिया और टीवी सीरियलों में दिखाए जा रहे नकारात्मक पारिवारिक चित्रण को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि परिवार समाज और राष्ट्र की मूल इकाई है, जिसे सहयोग और सकारात्मकता से मजबूत किया जाना चाहिए।
स्वदेशी के विषय में उन्होंने मेड इन इंडिया को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि जब देश में निर्मित वस्तुओं का उपयोग बढ़ेगा, तभी मेक इन इंडिया का सपना साकार होगा। उन्होंने जापान का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां अपने उत्पादों के उपयोग ने वैश्विक स्तर पर विश्वास स्थापित किया है।
भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने मातृभाषा में संवाद, देवनागरी लिपि में लेखन और पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने मातृशक्ति से आह्वान किया कि वे बच्चों में कर्तव्यनिष्ठा, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का भाव विकसित करें।
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक मूल्यों की पुनस्र्थापना तथा समाज में सकारात्मक संवाद बढ़ाने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने महिलाओं से अपील की कि वे बैठक, लेखन, ब्लॉग और डिजिटल माध्यमों के जरिए परिवार व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दें।
अंत में बताया गया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देशभर में हजारों शाखाओं के माध्यम से राष्ट्र चेतना का कार्य कर रहा है, वहीं मातृशक्ति की राष्ट्र सेविका समिति मातृशक्ति को संगठित कर समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रही है।