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11 अप्रैल 2026
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राजऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय अलवर का षष्ठम दीक्षांत समारोह आयोजित, दीक्षांत समारोह में एक कुलाधिपति पदक, 42 स्वर्ण पदक, 6 रजत पदक एवं 40 पीएचडी उपाधि सहित 44 हजार 293 डिग्री प्रदान की गई

राजऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय अलवर का षष्ठम दीक्षांत समारोह आयोजित,  दीक्षांत समारोह में एक कुलाधिपति पदक, 42 स्वर्ण पदक, 6 रजत पदक एवं 40 पीएचडी उपाधि सहित 44 हजार 293 डिग्री प्रदान की गई
राजऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय अलवर का षष्ठम दीक्षांत समारोह आयोजित, दीक्षांत समारोह में एक कुलाधिपति पदक, 42 स्वर्ण पदक, 6 रजत पदक एवं 40 पीएचडी उपाधि सहित 44 हजार 293 डिग्री प्रदान की गई

विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के व्यक्तित्व एवं कौशल विकास पर करें फोकस: राज्यपाल 

दैनिक सम्राट संवाददाता
अलवर (भंवर सिंह)।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रतिभाशाली व्यक्तित्व तैयार करने के केंद्र बिंदु है, यहां विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता के साथ-साथ उनके समग्र विकास पर फोकस होना चाहिए, जिससे वे उच्च कौशल के साथ गुणवान व चरित्रावान बनकर देश के विकास में अपनी महती भूमिका निभा सके।
राज्यपाल बागडे गुरुवार को प्रताप ऑडिटोरियम में राज ऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय अलवर के षष्ठम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने समारोह में डिग्री एवं उपाधियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह पावन पर्व है। यह वह समय है जब विद्यार्थी अपनी शिक्षा पूरी कर उसके व्यवहार में उपयोग में लेने के योग्य बनते हैं। उन्होंने कहा कि आपने जो शिक्षा यहां प्राप्त की है, उसका उपयोग देश, राज्य और समाज के सर्वांगीण विकास में कर जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि देश में आजादी के बाद ’राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ इसी उद्देश्य से तैयार हुई है, जिससे हमारा देश आत्मनिर्भर बन सके। नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर विद्यार्थी को रोजगार प्रदाता बनाना है। यह नीति शिक्षा तक सबकी आसान पहुँच, समता, गुणवत्ता, वहनीयता और जवाबदेही के आधारभूत पांच स्तंभों पर निर्मित हुई है।
राज्यपाल बागडे ने कहा कि राजा भर्तृहरि की तपोभूमि पर स्थित यह विश्वविद्यालय ज्ञान के उत्कृष्ट केंद्र के रूप अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा वही सार्थक है, जो जीवन व्यवहार का मार्ग प्रशस्त करे। किताबों में अब तक जो पढ़ा, उसे व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है। इसके लिए मौजूद बौद्धिक क्षमता को और अधिक विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नही हैं। इसका असली उद्देश्य चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास, नैतिक मूल्यों की स्थापना और समाज सेवा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन में आगे बढऩे के अवसर ही नहीं देती बल्कि विद्यार्थी को संस्कारित करती है। उन्होंने कहा कि विनोबा भावे ने शिक्षा पद्धति के बदलाव पर जोर देते हुए कहा था कि स्वतंत्रता के समय ही मैकाले की शिक्षा पद्धति को बदलकर भारतीय शिक्षा पद्धति को लागू किया जाना चाहिए था।  
नेता प्रतिपक्ष एवं अलवर ग्रामीण विधायक टीकाराम जूली ने समारोह में डिग्री एवं उपाधियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि  वर्तमान समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है तथा एआई हर क्षेत्र में मददगार साबित हो रहा है। उन्होंने महाविद्यालय में एआई से जुडे कोर्स आदि जोडने की आवश्यकता पर बल दिया। इसी प्रकार आरटीई के अंतर्गत कॉलेज स्तर तक की शिक्षा को जोडने पर बल दिया। 
राजऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. रमन कुमार दवे ने बताया कि महाविद्यालय की शुरूआत 23 अगस्त 2012 में हुई। विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में 113 अकादमिक महाविद्यालय, 67 बीएड महाविद्यालय व 19 महाविद्यालयों में चार वर्षीय प्री-बीएड व बीएससी बीएड कोर्स संचालित हैं। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान, भूगोल, अंग्रेजी, इतिहास व गणित में स्नातकोतर पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। 
इस अवसर पर रामगढ विधायक सुखवंत सिंह, जिला कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला, पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी, कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के कुलगुरू प्रो. पुष्पेन्द्र चौहान, सरस डेयरी चैयरमेन  नितिन सांगवान, जिला अध्यक्ष अशोक गुप्ता व महासिंह चौधरी, पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा, कुल सचिव गोपाल कालरा, सहायक कुल सचिव डॉ. आशुतोष शर्मा, विधि सहायक निलेश पाण्डे एवं विश्वविद्यालय प्रबंधन मंडल व अकादमिक परिषद के सदस्य तथा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, अभिभावक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।