नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश पुलिस ने एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है, जिसके कथित तौर पर विदेशी हैंडलर्स और ISIS जैसे चरमपंथी संगठनों से संबंध हैं।
जांचकर्ताओं का दावा है कि यह नेटवर्क भारत में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने में शामिल था। यह खुलासा तब हुआ जब आंध्र प्रदेश पुलिस ने इस मामले के सिलसिले में करीब एक दर्जन संदिग्धों को गिरफ्तार करने के लिए कई राज्यों- बिहार, दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और राजस्थान में टीमें भेजीं। इन संदिग्धों में आंध्र प्रदेश के तीन लोग भी शामिल हैं।
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इस ग्रुप के विदेशी ऑपरेटिव्स से संबंध थे और यह ऑनलाइन जिहादी प्रोपेगैंडा सक्रिय रूप से फैला रहा था।
ISIS के 'जिहादी मॉड्यूल' का किया भंडाफोड़
खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने बताया, "एक जिहादी मॉड्यूल का पता चला है, जिसके विदेशी हैंडलर्स और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) तथा अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) जैसे चरमपंथी संगठनों से संबंध हैं। यह मॉड्यूल भारत में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने में लगा हुआ था।"
मुख्य आरोपी और उसके साथियों ने कथित तौर पर युवाओं को निशाना बनाने के लिए ऑनलाइन प्रोपेगैंडा का इस्तेमाल किया।
सोशल मीडिया के जरिए विदेशी हैंडलर्स से संपर्क
जांचकर्ताओं ने मुख्य आरोपी रहमतुल्लाह शरीफ को इस नेटवर्क का एक अहम चेहरा बताया है। पुलिस ने कहा कि शरीफ और उसके साथी कथित तौर पर ऐसे ऑपरेटिव्स के संपर्क में थे, जो जिहादी सामग्री फैलाने और ऑनलाइन वीडियो के जरिए युवाओं को प्रेरित करने में शामिल थे। आरोपियों पर चरमपंथी सामग्री साझा करने और सोशल मीडिया के जरिए विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में रहने का आरोप है।
इस ग्रुप पर ओसामा बिन लादेन, इसरार अहमद शेख, जाकिर नाइक और अनवर अल-अव्लाकी के वीडियो शेयर करने का आरोप है। इनका मकसद मुस्लिम युवाओं को जिहाद और चरमपंथी विचारधारा की ओर प्रभावित करना था। पुलिस को यह भी संदेह है कि यह नेटवर्क एक अलग 'ख्वातीन' (महिला) विंग के जरिए महिलाओं को अपने साथ जोड़कर अपना विस्तार करने की कोशिश कर रहा था।
पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सीरिया और बांग्लादेश से जुड़े तार
जांच में पता चला है कि इस ग्रुप ने 40 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सीरिया और बांग्लादेश में बैठे हैंडलर्स से संपर्क स्थापित किया था।
भारत में इस्लामिक स्टेट स्थापित करना चाहते आतंकी
एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क 'हिजरत' (पलायन) को बढ़ावा देने और भारत में एक इस्लामिक स्टेट, या 'खिलाफत' स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा था। अल-हकीम शकूर, मोहम्मद हुजैफा, निंजा, हेमरॉक्सी, अबू मुहरिब और अबू बलूची के रूप में पहचाने गए हैंडलर्स ने कथित तौर पर इस समूह को उग्रवादी प्रशिक्षण और स्नाइपर राइफल सहित हथियारों के इस्तेमाल के बारे में मार्गदर्शन दिया था।
कथित तौर पर उन्होंने समूह को यह भी भरोसा दिलाया कि हथियार मुहैया कराए जा सकते हैं। जांचकर्ताओं को आगे यह भी शक है कि इस मॉड्यूल से जुड़े कुछ कट्टरपंथी लोग पहले से ही विदेशों के मदरसों में जिहादी ट्रेनिंग ले रहे थे, जबकि इस नेटवर्क में और लोगों को भर्ती करने की कथित तौर पर कोशिशें की जा रही थीं।
पाकिस्तानी आकाओं के संपर्क में थी सईदा बेगम
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों में से एक, सईदा बेगम, कथित तौर पर पाकिस्तान के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में भी सक्रिय लोगों के संपर्क में थी और जिहादी गतिविधियों को कोऑर्डिनेट करने की योजना बना रही थी। जांच में साइबर आतंकवाद, IED बनाने का सामान और भारत-विरोधी सामग्री भी शामिल है।
भारत विरोधी एजेंडे पर कर रहे थे काम
पुलिस ने दावा किया कि सदस्यों ने 'ब्लैक पाउडर' और आईईडी बनाने से जुड़ी सामग्री अपलोड की थी, और साथ ही यह भी दावा किया था कि हथियार पाकिस्तान और अफगानिस्तान से मंगाए जाएंगे। इस समूह ने कथित तौर पर अपने सदस्यों की ऐसी तस्वीरें पोस्ट कीं जिनमें वे मास्क पहने हुए थे, ISIS के झंडे लहरा रहे थे और वन उम्माह जैसे नारे लगा रहे थे, ताकि भारत में एक इस्लामिक राष्ट्र बनाने के विचार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखा सकें।