बरेली. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रविवार को बरेली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधा। वे RSS प्रमुख के 3 बच्चे पैदा करने वाले बयान से जुड़े सवाल पर जवाब दे रहे थे। दरअसल, भागवत कई बार कह चुके हैं कि हिंदुओं के लिए तीन बच्चे पैदा करना जरूरी हैं। शंकराचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- हमने तो कहा था कि मोहन भागवत और उनके प्रचारक आएं, विवाह करें, बच्चे पैदा करें, जनसंख्या बढ़ाएं। एक तरफ सरकार कह रही है कि जनसंख्या विस्फोट हो रहा। दूसरी तरफ, ये लोग जनसंख्या बढ़ाने की बात करते हैं। अगर संख्या बढऩी इतनी जरूरी है तो आप शादी करके बच्चे पैदा क्यों नहीं करते। दूसरों पर बोझ क्यों लादते हो। पहले खुद करो, फिर दूसरों से कहो।’
पिछले महीने मथुरा दौरे पर भी भागवत ने कहा था- डॉक्टर मानते हैं कि अगर किसी परिवार में तीन संतान होती हैं तो माता-पिता और बच्चों के सेहतमंद होने की संभावना बढ़ जाती है। जैसा कि मानस शास्त्र कहता है कि घर में तीन बच्चे होने पर वे बड़े होकर बेहतर और संतुलित व्यक्तित्व के बनते हैं। आपसी झगड़े-टकराव भी कम होते हैं।
विपक्ष का समर्थन करने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि सत्ता पक्ष कहता है कि हम विपक्ष के साथ हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि आप हमारी बात सुनें। गो-माता की रक्षा के लिए कानून बनाएं। हम आपके साथ खड़े हो जाएंगे। मैं पक्ष-विपक्ष किसी के साथ नहीं हूं। जो भी हमारी बात सुनेगा। उसके साथ खड़ा हो जाऊंगा।
अमेरिका-इजराइल युद्ध पर विद्वानों को चुप होते देख हैरान हूं’ देवभूमि इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- जब युद्ध होता है तो हमेशा दो पक्ष होते हैं, उसमें एक न्याय और दूसरा अन्याय का होता है। जैसे आज एक पक्ष अमेरिका और इजराइल तो दूसरा ईरान है। आश्चर्य है कि पूरी दुनिया के विद्वान इस मुद्दे पर मौन हैं। ये मानवता के प्रति अपराध है।
शंकराचार्य ने कहा कि युद्ध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का क्या रिएक्शन रहा। इस पर मैं कुछ भी नहीं कहना चाहूंगा, लेकिन एक विद्वान का ये दायित्व होता है कि उसे बताना चाहिए कि ये व्यक्ति अन्याय कर रहा है और ये व्यक्ति अन्याय सह रहा है, क्योंकि युद्ध में दोनों अच्छे पक्ष नहीं हो सकते है।
उन्होंने कहा- भारत शुरू से गुट निरपेक्ष देश रहा है। भारत कभी भी युद्ध में किसी के साथ खड़ा नहीं हुआ। ये पहला अवसर है, जब प्रधानमंत्री जी के मौन के कारण लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि वे शायद किसी के पक्ष में खड़े हैं।
शंकराचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री खुलकर यहूदियों के पक्ष में हैं। यह बात हमें चिंता में डालती है। क्या भारत यहूदियों के जाल में फंस रहा है? युद्ध की वजह से गैस सिलेंडर की किल्लत है, लेकिन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को इसका अहसास नहीं है, क्योंकि उनके आवास की न बिजली जाती है। न ही राशन की कमी होती है। उनके लिए तो सब चंगा है, लेकिन जनता त्रस्त है।
‘गो-माता की रक्षा के मुद्दे पर वोट करें’ शंकराचार्य ने कहा कि मैंने सरकार को गो-माता के मुद्दे पर कानून लाने के लिए मोहलत दी थी, लेकिन मेरी बात नहीं सुनी गई। मैं विपक्ष के नेताओं से कहूंगा कि गो-माता के मुद्दे पर वोट करने के लिए लोगों को प्रेरित करें। जनता से कहना चाहूंगा कि वे गो-माता की रक्षा के मुद्दे पर वोट करें।
उन्होंने कहा कि जैसे ही चुनाव नजदीक आएगा लव जिहाद-धर्मांतरण जैसे तमाम मुद्दे ध्यान भटकाने के लिए सामने लाए जाएंगे, लेकिन जनता को डायवर्ट नहीं होना है। उन्हें सिर्फ अपने मुद्दों पर ही वोट करना है। हिंदू धर्म में गो-माता का बड़ा महत्व है। जब भी हिंदुओं के घरों में रोटी बनती है तो पहली रोटी गो-माता को ही खिलाई जाती है।

'ऋषिकेश जा रहे, समिति के निवेदन पर बरेली आए'
शंकराचार्य ने कहा- हम वाराणसी से चलकर दिल्ली होते हुए ऋषिकेश जा रहे हैं। भगवान बद्रीनाथ जी का ग्रीष्मकालीन पट खुलने वाला है। उसके लिए परंपरा के अनुसार जो ज्योति के तेल का घड़ा है, वह राज परिवार की तरफ से ऋषिकेश आया है। अब ऋषिकेश से 8 अप्रैल को उसको बद्रीनाथ जी के लिए ज्योर्तिमठ होते हुए रवाना किया जाएगा। ये परंपरा है।
उन्होंने बताया- इस बार जो समिति है, उन्होंने हमसे निवेदन किया था कि कि आप आइए। हम उसके लिए जा रहे हैं। जाते समय हमारे मन में यह बात आई कि बरेली धर्म-नगरी है। यहां के विद्वानों ने जिस तरह से सनातन धर्म के प्रति लोगों को सदा से जोड़ रखा है। वो हमें अच्छा लगता है। इसलिए हम बरेली में रुके हैं।