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11 अप्रैल 2026
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कथा में उतरा द्वारिका का रंग, कृष्ण-रुक्मणी विवाह से भक्तिमय हुआ माहौल

कथा में उतरा द्वारिका का रंग, कृष्ण-रुक्मणी विवाह से भक्तिमय हुआ माहौल
कथा में उतरा द्वारिका का रंग, कृष्ण-रुक्मणी विवाह से भक्तिमय हुआ माहौल

संत अभयदास बोले—भारत की सनातन परंपरा अद्वितीय
दैनिक सम्राट संवाददाता
भीनमाल (विक्रम राठी)।
नीमगोरिया क्षेत्रपाल मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी जी के विवाह प्रसंग का सजीव चित्रण किया गया, जिसमें श्रद्धालु स्वयं बाराती बनकर शामिल हुए और पूरा पंडाल उत्सवमय हो उठा।
व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए संत अभयदास महाराज ने भारत की सनातन परंपरा और इसकी प्राचीनता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का कोई मुकाबला नहीं है। सनातन धर्म ऐसा है जिसका न आदि है और न अंत। उन्होंने कहा कि विश्व के अन्य धर्मों की उत्पत्ति का समय निर्धारित किया जा सकता है, लेकिन भारत की सनातन परंपरा अनादि और अनंत है।
संत अभयदास ने कहा कि भारत का साहित्य भी अद्वितीय और अमर है, लेकिन गुलामी के दौर में लागू की गई मैकाले की शिक्षा पद्धति ने भारतीय दर्शन और संस्कृति को हाशिये पर डाल दिया। उन्होंने भीनमाल की ऐतिहासिक और साहित्यिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नगरी संस्कृत के महान कवि माघ की जन्मस्थली है, जो इसे विशेष गौरव प्रदान करती है। उन्होंने यहां संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की आवश्यकता पर बल देते हुए नागरिकों से इस दिशा में पहल करने का आह्वान किया।
अपने प्रवचन में उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा की व्याख्या करते हुए कहा कि "गुरु कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि गुरु द्वारा दिया गया मंत्र ही वास्तविक गुरु होता है।" उन्होंने कहा कि व्यक्ति परिवर्तनशील होता है, लेकिन मंत्र शाश्वत होता है और साधक को परम लक्ष्य तक पहुंचाने में सक्षम होता है।
कथा के दौरान श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह का दृश्य अत्यंत मनोहारी रहा। ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के बीच निकली बारात ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। महिलाओं ने मंगल गीत गाकर विवाह उत्सव को और अधिक जीवंत बना दिया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. घनश्याम व्यास ने किया। इस अवसर पर प्रेमाराम बंजारा, गेमाराम परमार, चम्पालाल शर्मा, पहाड़सिंह राव, दिनेश दवे, श्यामलाल दवे, नेनाराम चौहान, श्यामलाल खेतावत, कपूराराम जीनगर, निरंजन व्यास, वेलाराम घांची, सुरम सिंह, कालूराम परमार, जगदीश जाट, सालूराम देवासी, बगदाराम, मनोज गुप्ता, पारस घांची, सुभाष त्रिवेदी, कन्हैयालाल खंडेलवाल, विधुशेखर दवे (जोधपुर), संजना माहेश्वरी जोधपुर, दिनेश सोनी चाटवाड़ा, संजय जोशी, भारताराम सुंदेशा, अरविंद बंजारा, पारस बंजारा, कैसराम देवासी, भावेश बंजारा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।़