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13 मई 2026
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बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार, 206 सीटें जीतीं

बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार, 206 सीटें जीतीं
बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार, 206 सीटें जीतीं

दैनिक सम्राट संवाददाता
कोलकाता।
बंगाल की 293 सीटों के नतीजे आ गए। भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाने जा रही है। बीजेपी को 206 सीटें मिलीं। वहीं ममता की पार्टी ञ्जरूष्ट सिर्फ 81 पर सिमट गई। 2021 विधानसभा चुनाव की तुलना में टीएमसी को 134 सीटों का नुकसान हुआ है। कांग्रेस के खाते में 2 सीट आईं, वहीं दो सीटें हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी ने जीतीं। दो अन्य के खाते में आईं। भवानीपुर से सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,114 वोटों से हराया। सुवेंदु के खिलाफ यह उनकी लगातार दूसरी हार है। 2021 विधानसभा चुनाव में सुवेंदु नंदीग्राम से ममता के खिलाफ जीते थे। बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीट हैं, एक सीट फालता पर 21 मई को दोबारा मतदान होगा। रिजल्ट 24 मई को आएगा।
टीएमसी के मुकाबले भाजपा का 
वोट शेयर 5 प्रतिशत ज्यादा
2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 45.84 प्रतिशत रहा। यह टीएमसी के वोट शेयर 40.80 प्रतिशत से 5 प्रतिशत ज्यादा है। जबकि दोनों पार्टी की सीटों में करीब 125 का अंतर आया।
भगवा आंधी में चुनाव हार गईं ममता बनर्जी
भगवा आंधी से मुख्यमंत्री व तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी भी बच नहीं पाईं और बंगाल की सबसे हाट सीट भवानीपुर पर नेता प्रतिपक्ष व भाजपा प्रत्याशी सुवेंदु अधिकारी से 15,105 वोटों से हार गईं। सुवेंदु को 73,917 और ममता को 58,812 वोट मिले। सुवेंदु ने 2011 के विधानसभा चुनाव में भी ममता को नंदीग्राम सीट पर 1,956 वोटों से हराया था।
सुवेंदु इस बार भी भवानीपुर के साथ नंदीग्राम सीट पर खड़े हुए थे। उन्होंने वहां तृणमूल प्रत्याशी पवित्र कर को 9,665 वोटों से हराया। सुवेंदु को 1,27301 व पवित्र कर को 1,17,636 वोट मिले। ममता के कई मंत्री व पार्टी के दिग्गज नेता भी तेज थपेड़े नहीं सह पाए। हारने वाले मंत्रियों में शशि पांजा, ब्रात्य बसु, मानस भुइयां, अरूप बिश्वास, मलय घटक, सुजीत बोस, उदयन गुहा, बीरबाहा हांसदा, चंद्रिमा भट्टाचार्य, रथिन घोष, ज्योतिप्रिय मल्लिक, सिद्दीकुल्लाह चौधरी व मलय घटक शामिल हैं।
आठ जिलों में नहीं खुला टीएमसी का खाता
तृणमूल आठ जिलों अलीपुरद्वार, कलिंपोंग, पुरुलिया, बांकुड़ा, झाडग़्राम, जलपाईगुड़ी, पूर्व मेदिनीपुर व दार्जिलिंग में खाता तक नहीं खोल पाई। चुनाव प्रचार के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने दावा किया था कि तृणमूल को कई जिलों में इस बार एक सीट तक नसीब नहीं होगी। वहीं तृणमूल को मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर व दक्षिण 24 परगना जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में भी भारी झटका लगा है। वहां मुस्लिमों के एक बड़े वर्ग ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया।
तृणमूल नंदीग्राम के अलावा सिंगुर सीट भी हार गई, जहां वाममोर्चा के शासन में टाटा मोटर्स के नैनो कार कारखाने के लिए हुए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन छेडक़र ममता बंगाल की गद्दी पर पहुंची थी। 
इसी तरह नदिया व उत्तर 24 परगना जिलों के नतीजों ने भी साफ कर दिया कि मतुआ समुदाय ने इस बार भाजपा का खुलकर समर्थन किया।
भाजपा से जीतने वाले प्रमुख नेताओं में पूर्व केंद्रीय मंत्री निशिथ प्रमाणिक, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, रूपा गांगुली, अग्निमित्रा पाल, सुवेंदु अधिकारी के भाई दिब्येंदु अधिकारी, हिरन चटर्जी शामिल हैं।
कोलकाता में भी तृणमूल का बुरा हश्र
तृणमूल को अपने सबसे मजबूत गढ़ कोलकाता में भी जोरदार झटका लगा और यहां की टालीगंज, मानिकतल्ला, जोड़ासांको, रासबिहारी, श्यामपुकुर, जादवपुर समेत कई सीटों से हाथ धोना पड़ा। भाजपा को प्रचंड बहुमत दर्शाता है कि उसे महिलाओं का भी पूरा समर्थन मिला है, जिन्होंने लक्ष्मी भंडार की जगह अन्नपूर्णा भंडार पर भरोसा जताया है।
भाजपा के टिकट पर चुनाव लडऩे वालीं आरजी कर अस्पताल में दुष्कर्म व हत्या की शिकार हुई डॉक्टर की मां व संदेशखाली में महिलाओं के यौन उत्पीडऩ के खिलाफ मुखर हुईं रेखा पात्र की जीत ने यह भी साबित कर दिया कि महिलाओं की सुरक्षा बंगाल में प्रमुख चुनावी मुद्दों में से एक था।