अमेरिका ने 4 मई को होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही शुरू करने के लिए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ शुरू किया था। हालांकि एक दिन बाद ही ट्रम्प ने इसे रोकने का आदेश दिया। तब ट्रम्प ने कहा था कि पाकिस्तान के कहने पर उन्होंने यह ऑपरेशन रोका है।
हालांकि अब यह दावा किया जा रहा है कि सऊदी अरब की वजह से अमेरिका को यह कदम उठाना पड़ा। NBC न्यूज के मुताबिक सऊदी अरब ने इस मिशन में शामिल अमेरिकी विमानों को अपने एयरस्पेस और एयरबेस के इस्तेमाल की इजाजत देने से इनकार कर दिया।
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प ने अचानक सोशल मीडिया पर इस ऑपरेशन का ऐलान कर दिया था। इससे खाड़ी के सहयोगी देश चौंक गए। सऊदी लीडरशिप इससे नाराज हो गया। ट्रम्प ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत भी की, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। अमेरिका 2 दिन में सिर्फ 3 जहाज पार करा पाया और आखिरकार ट्रम्प को यह ऑपरेशन रोकना पड़ा।
इजराइल ने हिजबुल्लाह की रदवान यूनिट के कमांडर को मार गिराया
इजराइली सेना ने (IDF) ने बताया कि बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर किए गए हमले में हिजबुल्लाह की रदवान यूनिट के कमांडर अहमद बलूत मारे गए।
सेना ने यह भी कहा कि गुरुवार को इस हमले में नासेर यूनिट के इंटेलिजेंस विभाग के प्रमुख मोहम्मद अली बाजी और हिजबुल्लाह के एयर डिफेंस ऑब्जर्वेशन ऑफिसर हुसैन हसन रोमानि भी मारे गए हैं।
इससे पहले, हिजबुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में तैनात इजराइली सैनिकों पर कई रॉकेट दागे थे। हालांकि, इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
अल जजीरा के मुताबिक, इजराइली सेना ने जवाबी कार्रवाई में हिजबुल्लाह के 15 ठिकानों पर हमला किया है। इनमें हथियार भंडारण केंद्र भी शामिल बताए गए हैं।
ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2 मार्च से अब तक लेबनान पर इजराइली हमलों में कम से कम 2,715 लोगों की मौत हो चुकी है, 8,353 लोग घायल हुए हैं और 16 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। यह देश की कुल आबादी का करीब पांचवां हिस्सा है।
साथ ही, अल जजीरा ने अल शिफा अस्पताल के सुत्रों के हवाले से बताया कि, गाजा सिटी पर हुए इजराइली हमले में हमास के राजनीतिक ब्यूरो प्रमुख खलील अल हय्या के बेटे अज्जाम खलील अल हय्या की मौत हो गई।
इससे पहले हमास नेता खलील अल हय्या ने कहा था कि उनका बेटा इस हमले में घायल हुआ है। अब हमास के अधिकारी बासिम नईम ने इजराइली हमले में खलील अल-हय्या के बेटे के मारे जाने की पुष्टि कर दी है।
ईरान का पूरा यूरेनियम भंडार हटाने की मांग
पूर्व संयुक्त राष्ट्र परमाणु निरीक्षक और इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी के प्रमुख डेविड ऑलब्राइट ने कहा है कि ईरान के साथ किसी भी परमाणु समझौते में सिर्फ ज्यादा एनरिच्ड यूरेनियम ही नहीं, बल्कि उसका पूरा एनरिच्ड यूरेनियम भंडार हटाया जाना चाहिए।
इजराइल के चैनल 12 को दिए इंटरव्यू में ऑलब्राइट ने कहा कि लक्ष्य यह होना चाहिए कि ईरान के पास मौजूद पूरे 10 टन एनरिच्ड यूरेनियम को देश से बाहर किया जाए। अगर इसका कोई बड़ा हिस्सा भी ईरान में बचा रहता है तो यह खराब समझौता होगा, क्योंकि इससे ईरान भविष्य में परमाणु हथियार बनाने की क्षमता बनाए रखेगा।
उन्होंने कहा कि इसमें इस्फहान में रखा गया सिर्फ 60 फीसदी तक एनरिच्ड किए गए करीब 440 किलो यूरेनियम की बात नहीं है, बल्कि 2 फीसदी से 60 फीसदी तक एनरिच्ड पूरे यूरेनियम स्टॉक की बात है। अगर पूरा भंडार हटा दिया जाए तो ईरान को दोबारा हथियार स्तर का यूरेनियम बनाने में कई साल लग जाएंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है जिसमें ईरान का ज्यादा एनरिच्ड यूरेनियम हटाया जाए और कम से कम 12 साल तक यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगे। हालांकि बाद में सीमित संवर्धन की इजाजत दी जा सकती है और पूरा स्टॉक हटाने की शर्त शामिल नहीं है।
ऑलब्राइट ने कहा कि जून 2025 में ईरान के साथ हुई जंग और मौजूदा संघर्ष ने हालात पूरी तरह बदल दिए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि इजराइल के पिछले हमलों ने ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को काफी कमजोर किया है, हालांकि इसे पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।
ईरान बोला न्यूक्लियर मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं करेंगे
IRGC के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी से बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल ईरान के ही हाथ में रहना चाहिए।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, रेजाई ने चेतावनी दी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट का नियंत्रण ईरान से बाहर चला गया, तो दुश्मन फिर से इसे ईरान और उसके लोगों के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का मॉडल यही है कि क्षेत्र की सुरक्षा क्षेत्र के देश खुद संभालें। उनके मुताबिक, अमेरिका या यूरोप जैसी बाहरी ताकतों को इस इलाके से बाहर जाना चाहिए।
ईरान-अमेरिका में जंग खत्म करने को लेकर अलग-अलग दावे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि वे अमेरिका के साथ जंग रोकने और परमाणु प्रोग्राम से जुड़े समझौते के बेहद करीब पहुंच गए हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत विफल होती है तो बमबारी फिर शुरू की जा सकती है।
इससे पहले बुधवार को अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट में बताया गया था कि ईरान 48 घंटे के भीतर सीजफायर को लेकर सहमति दे सकता है। हालांकि ईरान ने इसे लेकर कोई साफ जवाब नहीं दिया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि समझौते के करीब होने की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया बताया। उन्होंने कहा कि हमने प्रस्ताव पर जवाब नहीं दिया है, हालांकि पाकिस्तान के जरिए बातचीत जारी है।
ईरान की मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिकी प्रस्ताव में कुछ ऐसी शर्तें हैं जो स्वीकार नहीं की जा सकतीं, लेकिन यह साफ नहीं किया गया कि वे कौन सी शर्तें हैं। ईरानी संसद की विदेश मामलों की समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजई ने इसे ‘अमेरिका की विशलिस्ट’ बताया है।