दैनिक सम्राट संवाददाता
जयपुर। पश्चिम बंगाल सहित असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिली सफलता के बाद जश्न का माहौल है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रदर्शन को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। जयपुर स्थित प्रदेश मुख्यालय पर ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ कार्यकर्ताओं ने जीत का जश्न मनाया। इस जीत के पीछे भाजपा की जिस रणनीति की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है "मारवाड़ी कनेक्शन" और राजस्थान के नेताओं की व्यापक तैनाती।
भाजपा ने पश्चिम बंगाल चुनाव में राजस्थान के 50 से अधिक नेताओं और पदाधिकारियों को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों और जिम्मेदारियों के साथ मैदान में उतारा। इन नेताओं को उन इलाकों में सक्रिय किया गया, जहां बड़ी संख्या में मारवाड़ी और राजस्थानी समाज के लोग निवास करते हैं, खासकर कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में। बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल में करीब 10 से 12 लाख प्रवासी राजस्थानी रहते हैं, जिनकी सामाजिक और आर्थिक पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन्हें अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बनाया।
भाजपा की रणनीति का दूसरा अहम पहलू सामाजिक और सांस्कृतिक नेटवर्क रहा। राजस्थान और बंगाल के बीच मौजूद व्यापारिक व सामाजिक संबंधों को चुनावी समर्थन में बदलने की कोशिश की गई। इसी क्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का पश्चिम बंगाल दौरा भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हरियाणा और दिल्ली के बाद बंगाल में भी उनका "पग फेरा" शुभ माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने सिलीगुड़ी, हावड़ा उत्तर, बैरकपुर सहित छह विधानसभा क्षेत्रों में सभाएं कीं और मारवाड़ी समाज व विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ बैठकें कर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया। उन्होंने व्यापार, सुरक्षा और विकास के मुद्दों पर संवाद करते हुए केंद्र सरकार की योजनाओं और "मोदी की गारंटी" को प्रमुखता से रखा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रवासी राजस्थानियों के साथ सीधा संवाद, स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करना और शीर्ष नेतृत्व की सक्रियता ने भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाई। यही कारण है कि पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रदर्शन को इस बार रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा नेता अरुण चतुर्वेदी, अशोक परनामी, ओमप्रकाश भाडाना को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभा, सी.पी. जोशी को सेंट्रल लीडर्स सभा, गजेंद्र सिंह शेखावत, कैलाश चौधरी को सिलीगुड़ी विभाग, राजेंद्र राठौड़ को भवानीपुर, और संगठनात्मक मोर्चे पर सुरेंद्र पारीक, रामलाल शर्मा और बिहारी बिश्नोई, रामचरण बोहरा गृहमंत्री अमित शाह की सभा की प्रमुख जिम्मेदारियां दी गईं।
विधानसभा क्षेत्रों में तैनाती के तहत विष्णु चेतानी को प्रवासी प्रबंधन, जितेंद्र गोठवाल को आसनसोल, अतुल भंसाली को कोलकाता नॉर्थ, शंकर सिंह राजपुरोहित को काशीपुर-बेलगछिया, मोतीलाल मीणा को कस्बा, मनोज राजोरिया को बेहाला पश्चिम, लादूलाल तेली को पनिहाटी, वासुदेव चावला और पवन दुग्गल को सोनारपुर उत्तर, अशोक सैनी को जादवपुर, कमलेश पुरोहित को खड़दह तथा अभिनेश महार्षि को जगतदल को जिम्मेदारी सौंपी गई। भवानीपुर सीट पर विशेष फोकस रखते हुए रवि नैयर, सोमकांत शर्मा, चगन राजपुरोहित, राजेश बबाल, वेदप्रकाश पटेल, सुनील छाबड़ा, गुरवीर सिंह बारड़ और सुभाष मील को तैनात किया गया। इसके अलावा वेदप्रकाश खटीक को जोरासांको, ओमप्रकाश बिजारणिया को एंटली की जिम्मेदारी दी जबकि नीरज जैन, सुशील कटारा, गोवर्धन वर्मा, राकेश पाठक, अखिलेश प्रताप सिंह, अखिलेश पारीक और कुमार लाखोटिया को सेंट्रल लीडर्स सभा में लगाया गया। युवा मोर्चा के तहत अभय बिदूरी ने कुमारग्राम-एसटी, अमन सैनी ने अलीपुरद्वार, राजवीर यादव ने चाकुलिया, हुलाश भाटी ने जोरासांको, सीताराम बिश्नोई ने श्रीरामपुर, बाबूलाल गुर्जर ने पुरसुराह, विकास जांघल ने खेजुरी-एससी, मुकेश कुमार वैष्णव ने बांकुरा और योगेश कुमार शर्मा ने बरजोड़ा को जिम्मेदारी दी गई, जबकि डॉ. शीला बिश्नोई को कोलकाता नॉर्थ में लगाया गया।
बंगाल चुनाव में भाजपा की रणनीति सफल. राजस्थान के 50 से ज्यादा नेताओं की तैनाती और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दौरे का दिखा असर
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