नई दिल्ली। अमेरिका की ईरान के खिलाफ 28 फरवरी को शुरू हुई जंग को दो महीने हो चुके हैं, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे छोटी और निर्णायक लड़ाई बताया था, लेकिन अब हालात उलट दिख रहे हैं।
जंग रुकी जरूर है, पर खत्म नहीं हुई। इस जंग में अब तक ईरान के 3,600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 1,700 से ज्यादा आम नागरिक हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गोरिन्शास ने चेतावनी दी है कि अगर यह संघर्ष लंबा चलता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो ग्लोबल आर्थिक ग्रोथ रेट गिरकर करीब 2 प्रतिशत तक आ सकती है, जिसे आम तौर पर ग्लोबल मंदी माना जाता है।
आईएमएफ ने बताया कि जंग से पहले उम्मीद थी कि इस साल वैश्विक महंगाई 4.1 प्रतिशत से घटकर 3.8 प्रतिशत हो जाएगी, लेकिन अब 4.4 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
वहीं हार्वर्ड की इकोनॉमिस्ट लिंडा बिल्म्स का अनुमान है कि अमेरिका ने इस युद्ध पर करीब 1 ट्रिलियन डॉलर यानी 95 लाख करोड़ रुपए खर्च किए हैं। हालांकि अमेरिकी सरकार ने 25 अरब डॉलर खर्च करने की बात कही है। दूसरी तरफ से इस जंग से चीन और रूस को फायदा मिल रहा है।
चीन और रूस को जंग से फायदा
चीन इस जंग से अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिख रहा है। चीन ने पहले ही तेल के भंडार जोड़ रखे थे और वैकल्पिक ऊर्जा पर भी कई दशकों पहले से ध्यान दे रहा था। साथ ही, अमेरिका की छवि कमजोर होने से उसे कूटनीतिक फायदा मिला है। चीन की तेल और गैस कंपनियां भी मुनाफा कमा रही हैं। सीएनएन के मुताबिक, 6 बड़ी कंपनियां इस साल 94 अरब डॉलर तक का फायदा कमा सकती हैं। इसके अलावा इस जंग से रूस की अर्थव्यवस्था को फायदा मिलता दिख रहा है। तेल और खाद की ऊंची कीमतों की वजह से रूस की कमाई बढ़ी है।
साथ ही जब तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं, तब अमेरिका ने समुद्र में मौजूद रूसी तेल पर कुछ समय के लिए पाबंदियां ढीली कर दीं, जिससे सप्लाई बढ़ सके, इससे रूस को और फायदा हुआ। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, मार्च में रूस की एनर्जी कमाई करीब दोगुनी होकर 19 अरब डॉलर पहुंच गई, जो फरवरी में 9.75 अरब डॉलर थी।
आम जनता पर सरकार की सख्ती
ईरान की सरकार ने भी अंदरूनी विरोध पर सख्ती बढ़ा दी है। साल की शुरुआत से अब तक 600 से ज्यादा लोगों को फांसी दी जा चुकी है। देश में आठ हफ्तों से इंटरनेट बंद है और अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। जिससे नौकरियां जा रही हैं और गरीबी बढ़ रही है।
एक्सपर्ट- इस जंग में कोई असली विजेता नहीं
ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट की सीनियर फेलो मेलानी सिसन ने सीएनएन से कहा कि जंग में कोई असली विजेता नहीं है। अमेरिका को भी रणनीतिक फायदा नहीं मिला है। संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है। ईरान, लेबनान और खाड़ी देशों से लेकर भारत तक पूरी दुनिया के लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं।
दावा- लेबनान के 15 प्रतिशत इलाके पर इजराइल का कंट्रोल
रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल ने लेबनान के करीब 15 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया है और वह इस इलाके को बफर जोन के रूप में बनाए रखना चाहता है, जब तक हिजबुल्लाह को कमजोर नहीं कर दिया जाता।सीनियर पत्रकार नोरा बौस्तानी का कहना है कि लेबनान के लोगों को सबसे बड़ा डर यही है कि देश का एक हिस्सा फिर लंबे समय तक विदेशी कब्जे में रह सकता है। यह इलाका मुख्य रूप से बॉर्डर से लेकर लितानी नदी तक फैला हुआ है।
लेबनान के लोग कई दशकों से हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष में फंसे हुए हैं। फरवरी तक एक नाजुक सीजफायर बना हुआ था, लेकिन हालात तब बिगड़ गए जब इजराइल ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मार दिया। इसके बाद हिजबुल्लाह ने इजराइल पर हमले शुरू कर दिए। जवाब में इजराइल ने लेबनान पर जोरदार एयरस्ट्राइक और जमीनी कार्रवाई शुरू की, जिसका मकसद हिजबुल्लाह को खत्म करना बताया गया। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 2 मार्च से अब तक इन हमलों में 2500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आया है कि इजराइल वही रणनीति अपना रहा है, जो उसने पहले गाजा में अपनाई थी। यानी पूरे के पूरे गांवों को तबाह करना। हालात इतने खराब हैं कि दक्षिणी लेबनान से करीब 6 लाख लोग अपने घर छोडऩे पर मजबूर हो गए हैं।
खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर असर
खाड़ी के कई देश भी इस जंग की चपेट में आ गए हैं। सबसे ज्यादा असर यूएई पर पड़ा है। यहां ईरान ने सबसे ज्यादा मिसाइल और ड्रोन हमले किए। हालांकि ज्यादातर हमले रोक दिए गए, लेकिन भारी नुकसान हुआ है और इससे यूएई की एक बड़े बिजनेस और टूरिज्म हब वाली छवि को झटका लगा है। वहीं, ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने से इराक, कतर और कुवैत की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। ये देश अपने तेल, गैस और दूसरे सामान की सप्लाई के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने भी इन देशों की आर्थिक ग्रोथ के अनुमान घटा दिए हैं और माना है कि इस साल इराक, कतर और कुवैत की अर्थव्यवस्था सिकुड़ सकती है।
अमेरिका में महंगाई
जंग से अमेरिका में पेट्रोल, हवाई टिकट और कई सर्विसेज महंगी हो गई हैं, क्योंकि कंपनियां अब कीमतों में फ्यूल सरचार्ज जोड़ रही हैं। महंगाई दर फरवरी के 2.4 प्रतिशत से बढक़र मार्च में 3.3 प्रतिशतहो गई है, और लोगों भरोसा (कंज्यूमर सेंटिमेंट) तेजी से गिर रहा है। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट के मुताबिक, अमेरिका की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल पर निर्भर है। वहीं, रिन्यूएबल एनर्जी (जैसे सोलर, विंड) में निवेश अभी भी कम है और यही अब कमजोरी बन रही है।
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