हिजबुल्लाह चीफ ने खाई कसम, अब हम युद्ध में पीछे नहीं हटेंगे, चाहे कुर्बानीं ही क्यों ना देनी पड़े

हिजबुल्लाह चीफ ने खाई कसम, अब हम युद्ध में पीछे नहीं हटेंगे, चाहे कुर्बानीं ही क्यों ना देनी पड़े

ताईवान। अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच हिजबुल्लाह चीफ शेख नईम कासिम का चेतावनी भरा बयान सामने आया है। हिजबुल्लाह चीफ ने साफ शब्दों में कहा कि उनका ‘लेबनानी मूवमेंट’ किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाला नहीं है और सरेंडर के बजाय टकराव का रास्ता ही चुनेगा।

कासिम ने यह भी दोहराया कि उनके लड़ाके बिना किसी शर्त कुर्बानी देने को तैयार हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की कोशिशें जारी हैं, लेकिन क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता दिख रहा है। हिजबुल्लाह ने इस पूरे संघर्ष को सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और क्षेत्रीय एकता की लड़ाई बताया है।

हिजबुल्लाह चीफ: जमीन, इज्जत और आजादी की लड़ाई

बुधवार को जारी अपने बयान में शेख नईम कासिम ने कहा कि लेबनान इस समय एक बेहद अहम मोड़ पर खड़ा है। उनके मुताबिक देश के सामने सिर्फ दो रास्ते हैं- पहला या तो सब कुछ छोड़कर सरेंडर कर दिया जाए, जिसमें जमीन, इज्जत और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी शामिल है, या फिर डटकर मुकाबला किया जाए और इसका डटकर मुकाबला किया जाए।

कासिम ने दावा किया कि हिजबुल्लाह के सक्रिय रुख ने इजराइल को कोई बड़ा कदम उठाने का मौका नहीं दिया और आगे बढ़ने के उसके सारे तरीके खत्म कर दिए। उन्होंने अपने लड़ाकों की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने बहादुरी, देशभक्ति और सम्मान की मिसाल पेश की है।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके लड़ाके हमेशा कुर्बानी देने के लिए तैयार रहते हैं और देश के लिए प्रेरणा का प्रतीक हैं। साथ ही, कासिम ने उन आम लोगों की भी सराहना की, जो इस संघर्ष में बेघर हो गए, लेकिन फिर भी बेहतर और सम्मानजनक भविष्य के लिए डटे हुए हैं।

शेख नईम कासिम ने अपने बयान में आगे कहा कि इजराइल का एक खतरनाक प्लान चल रहा है, जिसके तहत यूफ्रेट्स से लेकर नील नदी तक पूरे इलाके पर कब्जा करने की कोशिश हो रही है, जिसमें लेबनान भी शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 के आखिर से इजराइल लगातार हमले कर रहा है और कई बार सीजफायर समझौते तोड़ चुका है।

कासिम ने कहा कि इस खतरे से निपटने के लिए देश को एकजुट होना जरूरी है। उन्होंने सभी राजनीतिक मतभेद भुलाकर एक साथ खड़े होने की अपील की, ताकि दुश्मन को रोका जा सके। साथ ही, उन्होंने सरकार से उन नीतियों को वापस लेने को कहा जो रेजिस्टेंस को अपराध मानती हैं।

उन्होंने साफ कहा कि दुश्मन के साथ बातचीत करना मतलब सरेंडर करना है। जब तक लड़ाई जारी है, तब तक किसी भी तरह की बातचीत नहीं होगी। कासिम ने यह भी कहा कि ईरान की ताकत इस संघर्ष में एक बड़ा सहारा है और यह लड़ाई सिर्फ लेबनान नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी है।

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