राजस्थान के फार्मासिस्टों ने ग्रेड पे वृद्धि और कैडर पुनर्गठन की मांग हुई तेज

राजस्थान के फार्मासिस्टों ने ग्रेड पे वृद्धि और कैडर पुनर्गठन की मांग हुई तेज

चाकसू (लोकेश कुमार गुप्ता)। राजस्थान में कार्यरत फार्मासिस्टों ने अपने वेतनमान और सेवा ढांचे में सुधार की मांग को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद कर दी है। लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर अब प्रदेशभर के फार्मासिस्ट संगठित रूप से सरकार के समक्ष अपनी बात रख रहे हैं। इसी क्रम में राजस्थान फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल ने हाल ही में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, मुख्यमंत्री कार्यालय तथा मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा।प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व डॉ. प्रवीण कुमार सेन, शीशराम मेहला, फार्मासिस्ट ओमप्रकाश मीणा ने किया। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से फार्मासिस्टों की प्रमुख समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखते हुए सरकार से शीघ्र समाधान की मांग की।
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग वर्तमान ग्रेड पे को 3600 से बढ़ाकर 4600 करने की रखी गई है। फार्मासिस्ट ओमप्रकाश मीणा का कहना है कि उनके कार्य की प्रकृति, जिम्मेदारियों और स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान को देखते हुए यह वृद्धि पूरी तरह न्यायसंगत है। उन्होंने तर्क दिया कि अन्य राज्यों और समान श्रेणी के कर्मचारियों की तुलना में राजस्थान के फार्मासिस्टों का वेतनमान काफी कम है, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा है। इसके साथ ही प्रतिनिधि मंडल ने फार्मेसी कॉउन्सिल ऑफ इंडिया द्वारा प्रस्तावित वर्ष 2025 के नए ढांचे के अनुरूप फार्मेसी ऑफिसर कैडर लागू करने की भी मांग की। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में पदों का स्पष्ट वर्गीकरण नहीं होने के कारण पदोन्नति और कार्य विभाजन में असमानता बनी रहती है। यदि नया कैडर लागू किया जाता है तो इससे न केवल कार्यप्रणाली में सुधार होगा, बल्कि कर्मचारियों को स्पष्ट करियर प्रगति का मार्ग भी मिलेगा।ज्ञापन में पदानुक्रम आधारित नई वेतन संरचना का भी प्रस्ताव दिया गया है। प्रस्तावित ढांचे के अनुसार फार्मेसी अधिकारी को 4600, वरिष्ठ फार्मेसी अधिकारी को 4800, सहायक मुख्य फार्मेसी अधिकारी एवं मुख्य फार्मेसी अधिकारी को 5400, जिला फार्मेसी अधिकारी को 6600 तथा संयुक्त निदेशक (फार्मेसी) को 7600 ग्रेड पे देने का सुझाव रखा गया है। इस संरचना के माध्यम से फार्मासिस्टों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों और अनुभव के अनुसार उचित वेतनमान चाहते हैं।फार्मासिस्टों ने यह भी मांग की कि प्रत्येक पद के लिए जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण किया जाए, ताकि कार्य में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। 
उनका मानना है कि वर्तमान में कई स्थानों पर कार्यों का ओवरलैप होने से न केवल भ्रम की स्थिति बनती है, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।प्रतिनिधि मंडल ने सरकार का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि फार्मासिस्ट स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। दवाओं के प्रबंधन, मरीजों को सही दवा उपलब्ध कराने और अस्पतालों की दवा प्रणाली को सुचारू रखने में उनकी अहम भूमिका होती है। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।इस पूरे मामले पर उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने प्रतिनिधि मंडल को सकारात्मक आश्वासन दिया। 

14 hours, 35 minutes ago जयपुर