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13 मई 2026
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अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीस को मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं , सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में याचिका खारिज

अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीस को मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं , सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में याचिका खारिज
अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीस को मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं , सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में याचिका खारिज

बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग केस को लेकर लंबे समय से चर्चा में चल रही हैं. सुकेश की तरफ से जैकलीन को काफी महंगे गिफ्ट्स मिले. दोनों का नाम जुड़ चुका है. सुकेश से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में जैकलीन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था. एक्ट्रेस ने FIR रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है.


जस्टिस दत्ता ने कहा कि आरोप ये है कि आपको 200 करोड़ रुपए उपहार में मिले थे. हम इस बात की सराहना करते हैं कि कानून ऐसा है कि कोई भी इसमें शामिल हो सकता है. दो बहुत करीबी दोस्त, अगर एक दोस्त दूसरे दोस्त को कुछ देता है और फिर वो कोई अपराध करते हैं, ये अलग रखना बहुत मुश्किल है.

 

एक्ट्रेस ने क्या कहा

 

एक्ट्रेस की तरफ से दलील की गई थी कि उनके खिलाफ जो आरोप लग रहे हैं वह पूरी तरीके से झूठे हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें सुकेश चंद्रशेखर के अपराधी इतिहास के बारे में कुछ भी पता नहीं था. उनको यह भी नहीं पता था कि जो सुकेश ने उनको तोहफे दिए थे, वो अवैध रूप से की गई कमाई से थे. कोर्ट ने अभी इस मामले में कोई हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने कहा कि आरोप है कि 200 करोड़ रुपये के उपहार मिले, लेकिन कानून की प्राकृति ऐसी है कि कई बार तय कर पाना मुश्किल होता है जब दो लोग आपस में करीब होते हैं तो उनमें एक व्यक्ति किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल होता है. दूसरे की भूमिका क्या रही, इसे अलग करना आसान नहीं होता, ऐसे मामलों के लिए ट्रायल कोर्ट ही सही मंच होता है.

 

कोर्ट ने जैकलीन की याचिका पर क्या कहा?


जस्टिस दत्ता ने ये भी कहा कि हम समझते हैं कि ये पुनर्विचाराधीन है. बेहतर विकल्प यही है कि आप इस याचिका को वापस ले लें और उचित समय पर आएं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस याचिका को खारिज किया जाता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आक्षेपित आदेश में हाईकोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियां केवल मामले का निपटारा करते समय की गई थीं. आरोप तय करते समय ट्रायल कोर्ट याचिकाकर्ता की नए सिरे से सुनवाई कर सकता है.