नई दिल्ली। पिछले वर्ष जब डोनल्ड ट्रंप दोबारा व्हाइट हाउस पहुंचे, तो उन्होंने यूरोप के दक्षिणपंथी दलों के साथ रिश्ते मजबूत करने की कोशिश तेज की। उनका उद्देश्य एक नई अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक धुरी बनाना था। लेकिन हालिया ईरान युद्ध को लेकर इन्हीं दलों में असंतोष बढ़ गया है, जिससे संबंधों में तनाव आ गया है।
हालांकि, उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन के समर्थन में प्रचार किया, फिर भी यूरोप के दक्षिणपंथी नेताओं में एकजुटता अब कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। अप्रैल 2026 में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ईरान के साथ सैन्य संघर्ष ने उन यूरोपीय दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी नेताओं के साथ दरार को और गहरा कर दिया है, जिन्हें कभी मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (एमएजीए) का सहयोगी माना जाता था।ईरान-इजराइल तनाव के कारण, इटली की जियोर्जिया मेलोनी और फ्रांस की मरीन ले पेन जैसे नेताओं ने ट्रंप की नीतियों को 'अस्थिर' बताते हुए उनसे दूरी बना ली है, जिससे यूरोप-अमेरिका संबंध कमजोर हुए हैं। कभी ट्रंप का समर्थन करने वाले यूरोपीय राष्ट्रवादी अब ईरान के प्रति उनकी आक्रामक नीति का विरोध कर रहे हैं।
इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने सिसिली हवाई अड्डे का उपयोग करने से मना कर दिया। फ्रांस की मरीन ले पेन ने युद्ध के लक्ष्यों को अस्थिर बताया। अल्टरनेटिव फार जर्मनी पार्टी ने देश में अमेरिकी हवाई अड्डों को छोड़ने का आह्वान किया। ट्रम्प ने ईरान युद्ध में समर्थन न मिलने पर नाटो सहयोगियों की कड़ी आलोचना की है।
यद्यपि हंगरी के विक्टर ओर्बन जैसे कुछ नेता अभी भी ट्रंप के करीब हैं, लेकिन मेलोनी और ले पेन जैसे सहयोगियों के विरोध ने दरार को और चौड़ा कर दिया है। यह स्थिति बताती है कि ट्रंप की विदेशी नीतियों को अब उन यूरोपीय सहयोगियों से भी समर्थन नहीं मिल रहा है, जो पहले उनके वैचारिक सहयोगी थे।