दैनिक सम्राट संवाददाता
कोटा। कोटा के न्यू मेडिकल हॉस्पिटल में सीजेरियन डिलीवरी मामले में दूसरी मौत हो गई। गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे हॉस्पिटल में भर्ती एक महिला को हालत क्रिटिकल होने के बाद वेंटिलेटर पर लिया गया था। इसके बाद डॉक्टरों ने डेथ कंफर्म कर दी।
महिला के परिजन ने शव लेने से मना कर दिया। हॉस्पिटल में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के बाहर परिजन और कांग्रेस कार्यकर्ता धरने पर बैठे। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन से बातचीत के बाद परिजन शव लेने को राजी हो गए।
दरअसल, हॉस्पिटल के गायनिक वार्ड में 4 मई को सीजेरियन डिलीवरी के बाद 6 महिलाओं की किडनी फेल हो गई। इनमें से एक महिला पायल (28) की 5 मई को मौत हो गई, वहीं दूसरी महिला ज्योति (20) ने गुरुवार को दम तोड़ दिया। अन्य महिलाओं को जयपुर भेजने की तैयारी चल रही है।
टेक्निकल टीम कर रही जांच
गुरुवार सुबह कलेक्टर पीयूष समारिया हॉस्पिटल पहुंचे। उन्होंने कहा- मामले की जांच के लिए टीम गठित कर रखी है। वह टेक्निकल जांच कर रही है। जो दवाइयां दी गई थीं, वो क्लिनिकली सही थीं या नहीं, उसका एनालिसिस किया जा रहा है। उसके बाद ही कारण के बारे में कुछ कहा जा सकेगा।
दादी बच्चे को संभाल रही
जिस महिला पायल की 5 मई को मौत हुई थी, उसके बेटे को अब दादी संभाल रही है। घर में मातम का माहौल पसरा हुआ है। महिला के पति और परिवार का कहना है कि सब कुछ अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते हुआ।
प्रिंसिपल बोले- बाकी पेशेंट की हालत स्थिर
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. निलेश जैन ने कहा कि आज भी एक प्रसूता की मौत हुई है, दुखद है। अभी कारण का पता नहीं लग सका है कि किस वजह से तबीयत खराब होना शुरू हुई। उन्होंने कहा कि मरीजों को जयपुर के लिए ऑप्शन दिया है, अगर परिजन चाहते हैं तो उन्हें जयपुर शिफ्ट किया जाएगा। बाकी पेशेंट की हालत अभी खतरे से बाहर तो नहीं कह सकते, लेकिन स्थिर है।
जयपुर से कोटा पहुंची टीम
इधर, चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के निर्देश के बाद मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय डॉक्टरों की टीम जयपुर से कोटा पहुंची है। इनमें निश्चेतना विभाग के डॉ. निहार शर्मा, मेडिसिन विभाग के डॉ. सुनील कुमार महावर, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के डॉ. पवन अग्रवाल और नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. संजीव कुमार शर्मा शामिल हैं। यह टीम मौके पर पहुंचकर इलाज और जांच प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग करेगी।
कोटा: सरकारी हॉस्पिटल में डिलीवरी के बाद 48 घंटे में दूसरी मौत
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