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9 अप्रैल 2026
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ई-धरती पोर्टल की खामियों से जूझ रहे तहसीलदार, नियमों में संशोधन की मांग तेज

ई-धरती पोर्टल की खामियों से जूझ रहे तहसीलदार, नियमों में संशोधन की मांग तेज
ई-धरती पोर्टल की खामियों से जूझ रहे तहसीलदार, नियमों में संशोधन की मांग तेज

राजस्थान तहसीलदार सेवा परिषद ने राजस्व मंडल अध्यक्ष को दिया विस्तृत ज्ञापन
दैनिक सम्राट संवाददाता
जमवारामगढ़ (अंकिता शर्मा)।
प्रदेशभर के तहसीलदारों को ई-धरती पोर्टल पर कार्य निस्तारण में आ रही व्यावहारिक समस्याओं को लेकर राजस्थान तहसीलदार सेवा परिषद ने मंगलवार को राजस्व मंडल, अजमेर के अध्यक्ष अजिताभ शर्मा को  विस्तृत ज्ञापन भेजकर त्वरित समाधान की मांग की है। परिषद के अनुसार, राजस्थान भू-राजस्व (कृषि भूमि का अकृषि प्रयोजनार्थ संपरिवर्तन) नियम 2007 के प्रावधानों के बावजूद ई-धरती पोर्टल पर संपरिवर्तन के बाद भूमि का नामांतरण दर्ज नहीं हो पा रहा है। वर्तमान व्यवस्था में भूमि की केवल किस्म बदलकर जिमन नंबर 6 में दर्ज कर दी जाती है, जिससे भविष्य में वसूली, कुर्की और अन्य कानूनी कार्यवाहियों में यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि वास्तविक हितधारक कौन है।परिषद ने यह भी बताया कि ग्राम पंचायतों से ऑटो-फॉरवर्ड होकर आने वाले लंबित नामांतरण पोर्टल पर सबसे ऊपर दिखते हैं, जिससे अन्य प्रकरणों का निस्तारण बाधित होता है। इन प्रकरणों को प्राथमिकता क्रम में नीचे दर्शाने की मांग की गई है।
ज्ञापन में एक अन्य गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा गया कि भू-अभिलेख नियम 1957 के तहत नामांतरण जांच में भू-अभिलेख निरीक्षक की भूमिका निर्धारित है, लेकिन वर्तमान ऑनलाइन प्रक्रिया में उन्हें हटा दिया गया है। इससे त्रुटिपूर्ण नामांतरणों की संभावना बढ़ रही है, जो बाद में न्यायालयों में विवाद का कारण बनते हैं।परिषद ने फीफो सिस्टम में भी सुधार की मांग करते हुए कहा कि रहन एवं रहनमुक्त से जुड़े नामांतरणों को अलग श्रेणी में दिखाया जाए, ताकि उनका शीघ्र निस्तारण हो सके। साथ ही ऑटो म्यूटेशन में होने वाली त्रुटियों के सुधार के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान बनाने की आवश्यकता बताई गई है।
इसके अलावा, ग्राम पंचायत स्तर पर नामांतरण के रिव्यू का विकल्प उपलब्ध कराने, खसरा बट्टा नंबर देने की प्रक्रिया को व्यवहारिक बनाने, तथा ई-धरती पोर्टल पर तकनीकी सुधार कर निर्णय एवं संशोधन की प्रक्रिया को सरल करने की मांग भी उठाई गई है।परिषद ने लंबित जांच प्रकरणों की संख्या बढ़ाने का सुझाव देते हुए कहा कि वर्तमान सीमा (प्रति वर्ष 5) को बढ़ाकर प्रतिमाह 2 किया जाए, ताकि बढ़ते भूमि विवादों का समयबद्ध समाधान हो सके।
परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो राजस्व रिकॉर्ड अपडेट नहीं रह पाएंगे और आमजन के साथ-साथ राजस्व कार्मिकों को भी अनावश्यक कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। ज्ञापन देने के दौरान राजस्थान तहलीलदार सेवा परिषद के प्रदेशाध्यक्ष व जमवारामगढ़ तहसीलदार रामधन विश्नोई व परिषद के महामंत्री जीवन शर्मा आदि पदाधिकारी मौजूद थे। राजस्व मंडल अध्यक्ष ने सभी समस्याओं का परीक्षण करवाकर समाधान का भरोसा दिलाया।