निजामाबाद। राष्ट्रीय स्वयं सेवक (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि केशव बलिराम हेडगेवार ने देश को विदेशी शासन से आजाद कराने और हिंदुओं के बीच फूट को खत्म करने के मकसद से आरएसएस की स्थापना की थी।
उन्होंने कहा कि हेडगेवार का मानना था कि समाज में एकता की कमी ही बार-बार गुलामी की बड़ी वजह रही। संघ प्रमुख ने कहा कि हेडगेवार ने ब्रिटिश शासन को खत्म करने के लिए राजनीतिक और हथियारबंद विरोध समेत कई रास्तों पर काम किया था।
भागवत ने कहा कि आजादी के लिए काम करते हुए हेडगेवार को यह एहसास हुआ कि अंग्रेज भारतीयों को गुलाम बनाने वाले पहले बाहरी शासक नहीं थे। उनके मुताबिक, समस्या सिर्फ बाहर से आने वाली ताकत नहीं थी, बल्कि समाज के भीतर भी एक कमी थी।
भागवत शनिवार को तेलंगाना के निजामाबाद जिले के कंडाकुर्थी गांव में श्री केशव स्फूर्ति मंदिर के उद्घाटन के बाद बोल रहे थे। यह गांव हेडगेवार का पैतृक गांव है। उन्होंने कहा- हममें कोई कमी थी, जिसकी वजह से हमें बार-बार हार का सामना करना पड़ा। इसलिए उस कमी को दूर करना जरूरी था।
हिंदुत्व का मतलब दूसरों के साथ मिलकर रहना, अपने रास्ते पर चलना और बाकी लोगों का सम्मान करना है। आरएसएस की प्रार्थना भी इन्हीं गुणों को दिखाती है और शाखा में आने वालों में यही संस्कार विकसित होते हैं। हेडगेवार हिंदुओं को मजबूत, निडर और अच्छा इंसान बनाने के पक्ष में थे। हेडगेवार का मानना था कि अगर इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो देश को बार-बार आजादी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।
आरएसएस की स्थापना किसी के खिलाफ नहीं हुई थी। इसे किसी पर हमला करने के लिए नहीं, बल्कि अपनी मातृभूमि को गुलामी से मुक्त कराने के लिए शुरू किया गया था।
जैसा हेडगेवार ने सोचा था, उसी दिशा में काम करने वाले कार्यकर्ता आज सक्रिय हैं और समाज को मजबूत बनाने में लगे हैं। कंडाकुर्थी में बना स्फूर्ति केंद्र देश के लिए निस्वार्थ भाव से काम करने की प्रेरणा देगा।
हिंदुओं में फूट, गुलामी की यही वजह, भारत में समस्या बाहर ही नहीं अंदर भी थी: भागवत
हिंदुओं में फूट, गुलामी की यही वजह, भारत में समस्या बाहर ही नहीं अंदर भी थी: भागवत