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17 अप्रैल 2026
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महिला आरक्षण बिल पर संसद में टकराव, 251 बनाम 185 वोट से पेश हुआ विधेयक

महिला आरक्षण बिल पर संसद में टकराव, 251 बनाम 185 वोट से पेश हुआ विधेयक
महिला आरक्षण बिल पर संसद में टकराव, 251 बनाम 185 वोट से पेश हुआ विधेयक

नई दिल्ली। संसद-विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने के लिए लाए गए 131वें संविधान संशोधन बिल में लोकसभा सीटों के परिसीमन का मामला शामिल किए जाने के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी जोर आजमाइश, तकरार से लेकर गोलबंदी की पूरी तस्वीर विधेयक पेश होने के दौरान ही साफ हो गई।
विधेयक पर चर्चा से पहले ही इसको पेश करने के मुद्दे पर ही पक्ष और विपक्ष दोनों ने सदन में संख्या बल की अपनी ताकत दिखाने से गुरेज नहीं किया। कानून-नियमों की कसौटी से लेकर विधेयक की वैधता पर 40 मिनट से अधिक चले वार-पलटवार के बीच अंतत: विधेयक को पेश करने की अनुमति का फैसला वोटिंग से हुआ जिसके पक्ष में 251 तथा विरोध में 185 वोट पड़े।
सरकार ने पेश किया बिल
सरकार सदन में सामान्य बहुमत के आधार पर 131वें संविधान संशोधन बिल के साथ परिसीमन आयोग के गठन संबंधी अन्य दो विधेयकों को पेश करने में सफल जरूर रही मगर परिसीमन के खिलाफ विपक्ष की दिखी गोलबंदी से साफ है कि शुक्रवार को संविधान संशोधन पारित कराने के लिए दो तिहाई संख्या जुटाने की सत्ता पक्ष की राह आसान नहीं है।
लोकसभा में विधेयक पेश किए जाने के दौरान ही विपक्ष ने इसे परिसीमीन से जोडऩे पर सवाल उठाते हुए इसकी राह रोकने की कोशिश की। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने परिसीमन को महिला आरक्षण का आवरण दिए जाने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि महिलाओं के लिए आरक्षण कानून में प्रस्तावित बदलावों को 2023 में इसे पारित किए जाने के दौरान क्यों शामिल नहीं किया।
महिलाओं के लिए आरक्षण कानून में बदलाव और परिसीमन आयोग बनाने वाले बिल को एक साथ जोडऩा असंवैधानिक हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी विधेयक को जातीय जनगणना के बिना परिसीमन से जोडऩे की वैधता पर सवाल उठाए। ओबीसी तथा मुस्लिम वर्ग की महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर इस दौरान अखिलेश और गृहमंत्री अमित शाह के बीच वाकयुद्ध भी हुए।
कितने पड़े वोट?
आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन, टीएमसी की डा काकोली दस्तीदार, द्रमुक के टीआर बालू तथा एआईएमआईएम के असद्दुदीन ओवैसी जैसे विपक्षी दलों के नेताओं महिला आरक्षण का समर्थन तो किया मगर परिसीमन को इससे जोडऩे को गैर संवैधानिक बताते हुए पेशी का विरोध किया।
स्पीकर ओम बिरला ने इन एतराजों को खारिज करते हुए पिछले दृष्टांतों का हवाला देते हुए कानूनी मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को विधेयक पेश करने की इजाजत दे दी। तब औवेसी समेत कुछ विपक्षी सांसदों ने मत विभाजन की मांग कर दी और अंतत: वोटिंग हुई। सत्ता पक्ष के 251 सांसदों ने विधेयक पेश किए जाने के पक्ष में तो विपक्ष के 185 सदस्यों ने इसके खिलाफ मत दिया।