नई दिल्ली। नासा का यान 54 साल बाद एक बार फिर चांद के लिए रवाना हुआ है। बुधवार को आर्टेमिस-2 से चार अंतरिक्ष यात्री 10 दिन की चांद यात्रा पर निकले हैं। यह यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि यह पहली बार होगा जब इंसानी आंखों से चांद के अनदेखे हिस्से को देखा जाएगा।
हालांकि यह विमान चांद की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन उसके बेहद करीब से गुजरेगा। चांद के सबसे दूर वाले हिस्से के पीछे से गुजरते हुए यान करीब सात हजार किलोमीटर आगे तक जाएगा। बता दें अंतरिक्ष में इतना दूर अभी तक कोई मानवयुक्त विमान नहीं गया है।

चांद के उस पार इंसान
इस मिशन में 3 अमेरिकी और एक कनाडाई नागरिक शामिल हैं। कमांडर रीड वाइसमैन के साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टिना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन इस मिशन का हिस्सा हैं। मून मिशन की ये सबसे विविध टीम है, जिसमें पहली महिला, पहला अश्वेत और पहला गैर-अमेरिकी शामिल है।
इंसान आखिरी बार साल 1972 में नासा के अपोलो-17 मिशन के तहत चांद पर गया था। अब तक सिर्फ अमेरिका ने ही इंसान को चांद पर भेजा है। नासा के 1969 से 1972 के बीच कुल 12 अंतरिक्ष यात्री चांद पर उतारे थे।
आर्टेमिस- 2 का टारगेट
- आर्टेमिस का मिशन चांद पर स्थायी मौजूदगी का बनाना है।
- साल 2027 में आर्टेमिस-3 और 2028 में आर्टेमिस 4 भी चंद्रमा पर उतरेंगे।
- स्थायी बेस और रोबोटिक रोवर जैसी योजनाएं इस मिशन पर निर्भर हैं।
- मिशन में जोखिम बहुत ज्यादा है। हालांकि जोखिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं है।
- नासा के अनुसार, सफलता की संभावना महज 50% हैं।
- लॉन्च के कुछ देर बाद ओरियन कैप्सूल का टॉयलेट खराब हो गया था।
- अंतरिक्ष यात्रियों को अस्थायी व्यवस्था से काम चलाना पड़ा।
- हाइड्रोजन लीक और अन्य तकनीकी समस्याओं के चलते मिशन में देरी हुई थी।
- लॉन्च से पहले 'लॉन्च अबॉर्ट सिस्टम' में दिक्कत आई थी।
- कैप्सूल का संपर्क भी कुछ देर के लिए टूट गया था।