60 करोड़ की लागत से बनने वाले अस्पताल भवन का निर्माण कार्य कछुआ चाल से जारी, जनता में बढ़ रहा आक्रोश
दैनिक सम्राट संवाददाता
चाकसू (लोकेश कुमार गुप्ता)। चाकसू क्षेत्र की बढ़ती आबादी और स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता को देखते हुए वर्षों पहले जिस उप जिला अस्पताल के नवीन भवन की सौगात जनता को दी गई थी, वह आज भी अधूरी उम्मीद बनकर रह गई है। लगभग 60 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले अत्याधुनिक अस्पताल भवन का करीब 6 महीने पहले बड़े समारोह के साथ शिलान्यास किया गया था, लेकिन इसके बाद निर्माण कार्य की रफ्तार इतनी धीमी हो गई कि अब स्थानीय लोगों में इसको लेकर भारी नाराजगी और चर्चा का माहौल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस अस्पताल भवन को क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने वाला बड़ा प्रोजेक्ट बताया गया था, वह आज केवल कागजों और शिलान्यास पत्थरों तक सीमित नजर आ रहा है। निर्माण स्थल पर कभी-कभार कुछ मजदूर दिखाई देते हैं, जबकि बड़े स्तर पर कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपए की योजना होने के बावजूद जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
गौरतलब है कि चाकसू उप जिला अस्पताल के नवीन भवन की स्वीकृति करीब 4 वर्ष पहले ही जारी हो चुकी थी। इसके बाद क्षेत्रवासियों को उम्मीद जगी थी कि जल्द ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त अस्पताल भवन तैयार होगा और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। लेकिन वर्षों तक फाइलों में उलझा यह प्रोजेक्ट आखिरकार 6 महीने पहले शिलान्यास तक पहुंचा, मगर अब निर्माण कार्य की धीमी गति ने लोगों की उम्मीदों पर फिर पानी फेर दिया है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वर्तमान अस्पताल भवन में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन संसाधन और सुविधाएं सीमित हैं। कई बार मरीजों को जयपुर रेफर करना पड़ता है। ऐसे में नवीन अस्पताल भवन क्षेत्र की बड़ी आवश्यकता बन चुका है। लोगों का सवाल है कि जब सरकार ने बजट जारी कर दिया, स्वीकृति मिल गई और शिलान्यास भी हो गया, तो फिर निर्माण कार्य में आखिर देरी क्यों हो रही है।
समाजसेवी एमडी इसराईल देशवाली स्थानीय व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों में चर्चा है कि अस्पताल निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य में हो रही लापरवाही सीधे आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर निर्माण कार्य पूरा हो जाए तो चाकसू सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी। लेकिन वर्तमान स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह प्रोजेक्ट भी अन्य सरकारी योजनाओं की तरह लंबे समय तक अधूरा ही रह सकता है।
वहीं स्थानीय विधायक रामावतार बैरवा और अन्य जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन उसके बाद जनप्रतिनिधि निर्माण कार्य की प्रगति को लेकर गंभीर नजर नहीं आए। जनता पूछ रही है कि आखिर क्षेत्र के विधायक और प्रशासन इस मामले में कब सक्रिय होंगे? क्या केवल शिलान्यास करना ही जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है या फिर समय पर कार्य पूर्ण करवाना भी उनकी जवाबदेही है क्या शिलान्यास की फोटो खिंचवाना ही रह गया। समाजसेवी एमडी इसराईल देशवाली सहित स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही निर्माण कार्य में तेजी नहीं लाई गई तो क्षेत्रवासियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है। लोगों ने प्रशासन और मुख्यमंत्री सरकार, चिकित्सा मंत्री से मांग की है कि अस्पताल निर्माण कार्य की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय हो और तय समय सीमा में कार्य पूरा करवाया जाए।