दैनिक सम्राट संवाददाता लोकेश कुमार गुप्ता से उप अस्पताल में कार्यरत स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. हंसराज मीणा से विशेष बातचीत
दैनिक सम्राट संवाददाता
चाकसू (लोकेश कुमार गुप्ता)। चाकसू कस्बे के उप जिला अस्पताल में कार्यरत स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. हंसराज मीणा ने गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीने यानी पहली तिमाही सबसे अधिक संवेदनशील होती है। इस दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी गर्भपात के खतरे को बढ़ा सकती है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि गर्भावस्था के दौरान तली-भुनी, मसालेदार चीजों से दूर रहना चाहिए तथा संतुलित और पौष्टिक आहार को अपनाना अत्यंत जरूरी है।
प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत दैनिक सम्राट के संवाददाता से विशेष बातचीत में डॉ. मीणा ने बताया कि मां बनने का अहसास हर महिला के लिए बेहद खास होता है, लेकिन इसके साथ ही जिम्मेदारियों और सावधानियों का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है। गर्भावस्था के नौ महीनों को तीन ट्राइमेस्टर में बांटा गया है, जिसमें पहली तिमाही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण होती है। इस दौरान भ्रूण का विकास प्रारंभ होता है और महिला के शरीर में तेजी से हार्मोनल बदलाव आते हैं। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था का पता चलते ही तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर जरूरी जांच करवानी चाहिए। शुरुआती जांच में ब्लड ग्रुप, शुगर लेवल, हीमोग्लोबिन और यूरिन टेस्ट शामिल हैं। इसके अलावा छह सप्ताह के भीतर पहली सोनोग्राफी करवाना जरूरी होता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि गर्भ सही स्थान यानी बच्चेदानी में है या नहीं। कई मामलों में प्रेग्नेंसी फैलोपियन ट्यूब में भी विकसित हो सकती है, जो मां के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
डॉ. हंसराज मीणा ने बताया कि उप जिला अस्पताल चाकसू में पिछले छह वर्षों से वे गर्भवती महिलाओं को चिकित्सा परामर्श दे रहे हैं और यहां आने वाली महिलाएं उनकी सेवाओं से संतुष्ट नजर आती हैं। अस्पताल में हर बुधवार और शुक्रवार को गर्भवती महिलाओं के लिए निशुल्क सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। इसके अलावा मां वाउचर योजना के तहत प्रत्येक माह की 9, 18 और 27 तारीख को निजी सेंटर पर भी निशुल्क सोनोग्राफी करवाई जाती है। इन दिनों अस्पताल में आने वाली महिलाओं की ब्लड प्रेशर जांच, ब्लड टेस्ट और अन्य आवश्यक जांच भी की जाती हैं।
उन्होंने गर्भावस्था के दौरान खान-पान को लेकर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। डॉ. मीणा के अनुसार सुबह उठते ही मितली और उल्टी की समस्या से बचने के लिए हल्के कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ जैसे बिस्किट, टोस्ट या खाखरा लेना फायदेमंद रहता है। अधिक खटाई खाने से एसिडिटी की समस्या हो सकती है, इसलिए इससे बचना चाहिए। तले-भुने और अधिक मसालेदार भोजन से परहेज करते हुए हरी सब्जियां, फल और संतुलित आहार लेना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों में हल्की एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग और नियमित वॉक करना फायदेमंद होता है, लेकिन ऐसी कोई भी गतिविधि नहीं करनी चाहिए जिससे पेट पर दबाव पड़े। इसके अलावा तेज परफ्यूम या तीव्र गंध से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इससे उल्टी या असहजता बढ़ सकती है।
डॉ. मीणा ने कब्ज की समस्या को भी गर्भावस्था में आम बताते हुए कहा कि इससे बचने के लिए रेशेदार आहार लेना चाहिए और दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि पानी स्वच्छ और सुरक्षित हो, क्योंकि संक्रमित पानी पीने से अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।उन्होंने गर्भवती महिलाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की दवा न लेने की सख्त हिदायत दी जाती है। कई बार सामान्य लगने वाली दवाएं भी गर्भ में पल रहे शिशु पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। इसके अलावा पहली तिमाही में लंबी यात्रा करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे थकान और अन्य जोखिम बढ़ सकते हैं।अंत में डॉ. हंसराज मीणा ने कहा कि नियमित जांच, संतुलित आहार, उचित आराम और डॉक्टर की सलाह का पालन करने से गर्भावस्था को सुरक्षित और स्वस्थ बनाया जा सकता है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे किसी भी समस्या या शंका की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें, ताकि मां और शिशु दोनों स्वस्थ रह सकें।
उप जिला अस्पताल चाकसू में उपलब्ध सुविधाओं और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं, जो सुरक्षित मातृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वही 2 बजे से शाम 5बजे तक महिलाओं को डाक्टर हंसराज मीणा के द्वारा निशुल्क चिकित्सा परामर्श दिया जाता है