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19 मई 2026
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छूट मिले या न मिले, रूसी तेल खरीदता रहेगा भारत

छूट मिले या न मिले, रूसी तेल खरीदता रहेगा भारत
छूट मिले या न मिले, रूसी तेल खरीदता रहेगा भारत

दैनिक सम्राट संवाददाता
नई दिल्ली।
अमेरिका की रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट की अवधि 16-17 मई 2026 को समाप्त हो गई, लेकिन भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रतिबंध हटाए जाएं या लगाए रखे जाएं, रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रहेगी।
पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, अमेरिकी प्रतिबंध से मिली छूट आगे जारी रहती है या नहीं, इससे रूस से तेल खरीदने के हमारे फैसले पर कोई असर नहीं होगा। भारत अपने देश की ऊर्जा जरूरत के हिसाब से तेल खरीदता है।
रूस से तेल खरीदते रहेंगे
शर्मा पश्चिम एशिया संकट के संदर्भ में भारत में पेट्रोलियम आपूर्ति की स्थिति पर बात कर रही थी। वैसे यह भारत का आधिकारिक रुख रहा है कि वह बगैर किसी बाहरी दबाव में अपनी घरेलू जरूरत व वाणिज्यिक फैसलों के आधार पर तेल की खरीद करता है लेकिन सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी की तरफ से दो टूक जवाब देने के अलग निहितार्थ लगाये जा रहे हैं।
फरवरी, 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से भारत ने रूस से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल की खरीद शुरू की थी। उसके बाद कुछ ही महीनों में भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 0.02 फीसद से बढ़ कर कुछ दिनों पहले तक 40 फीसद तक हो गई। अमेरिका लगातार यह दबाव बना रहा था कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदे। अमेरिका का कहना है कि रूस तेल बेच कर युद्ध की तैयार कर रहा है। भारत ने कभी इस दबाव को नहीं माना।
बाद में डोनल्ड ट्रंप प्रशासन ने 2025 में भारत पर 25 फीसद पेनल्टी टैरिफ की धमकी दी और रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाया। इसका कुछ असर भारत पर हुआ क्योंकि नवबर-दिसंबर 2025 में भारत ने रूस से तेल की खरीद कम की थी। 2026 में ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने पर अमेरिका ने मार्च 2026 में भारत को उक्त प्रतिबंध से 30 दिनों की अस्थायी छूट दी, जिसे बाद में बढ़ाकर 16 मई 2026 तक किया गया। अब यह छूट समाप्त हो गई है।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि प्रतिबंध से मिले छूट को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी पक्ष से बातचीत चल रही है। इस सप्ताहांत अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत दौरे पर आने वाले हैं। उनके साथ होने वाली वार्ता में भी यह मुद्दा अहम रहेगा।
रोजाना 750 करोड़ रुपए का घाटा
बहुत संभव है कि तेल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) आम जनता पर पेट्रो उत्पादों की एक और वृद्धि का बोझ डालें। वजह यह है कि उन्हें अभी भी देश में पेट्रो उत्पादों की बिक्री में 750 करोड़ रुपए का रोजाना घाटा हो रहा है। यह बात पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को कही।