Dainik Samrat Logo
🔗
💬 WhatsApp 📘 Facebook 🐦 Twitter
30 मई 2026
Epaper

भारत पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था बना, AI इंडेक्स में भी चौथा स्थान

भारत पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था बना, AI इंडेक्स में भी चौथा स्थान
भारत पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था बना, AI इंडेक्स में भी चौथा स्थान

नई दिल्ली। भारत ने वैश्विक डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस में जर्मनी, फ्रांस, जापान, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है। 'स्टेट ऑफ इंडियाज डिजिटल इकोनॉमी' 2026 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था बन गया है।

यही नहीं, एआई (AI) परफॉर्मेंस के मामले में भारत अब अमेरिका, चीन और सिंगापुर के बाद दुनिया में चौथे नंबर पर है।

इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (आईसीआईआईईआर) के सेंटर फॉर इंटरनेट एंड डिजिटल इकोनॉमी द्वारा शुक्रवार को जारी स्टेट ऑफ इंडियाज डिजिटल इकोनॉमी (साइड) 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत साल 2025 के आठवें स्थान से बड़ी छलांग लगाकर अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था बन गया है। वहीं एआई इंडेक्स में अमेरिका, चीन और सिंगापुर के बाद चौथे स्थान पर है।

जर्मनी, फ्रांस, जापान और कनाडा से आगे भारत

भारत को मिली यह कामयाबी डिजिटल कनेक्टिविटी, फिनटेक विकास और नवाचार क्षमता में सुधार का परिणाम है। दुनिया की जीडीपी के 96% को कवर करने वाले 71 देशों में की गई स्टडी से यह पता चला है कि भारत डिजिटल प्रदर्शन के मामले में जर्मनी, फ्रांस, जापान और कनाडा सहित प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं से बहुत आगे निकल रहा है।

भारत ने डिजिटल रूप से प्रदान की जाने वाली सेवाओं के माध्यमों से करीब 31 लाख करोड़ रुपए का ट्रेड किया। भारत अब दुनिया के दूसरे सबसे बड़े एआई टैलेंट पूल का घर बन चुका है।

हालांकि, इस बड़ी कामयाबी के बीच विशेषज्ञों ने देश में एआई निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को एक बड़ी चुनौती बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि विकास का अगला चरण इस बात पर निर्भर करता है कि हम एआई का कितना प्रभावी ढंग से उपयोग करते हैं।'

अकेले भारत में 26 प्रतिशत यूजर

गौरतलब है कि श्विक स्तर पर कुल AI उपयोग का लगभग 40% हिस्सा अकेले भारत और चीन मिलकर संभालते हैं। दुनिया भर के कुल AI उपयोगकर्ताओं में से 26% यूजर अकेले भारत में हैं।

इतनी बड़ी क्षमता के बाद भी वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल निजी एआई निवेश का केवल 1% हिस्सा ही भारत को मिल पाता है। क्योंकि, एडवांस चिप्स, सुपरकंप्यूटिंग क्षमता और बड़े एआई मॉडल का निर्माण और नियंत्रण अभी भी दुनिया के चुनिंदा विकसित देशों के पास ही सीमित है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत को अपने डिजिटल स्केल को इनोवेशन के लिए अधिक निवेश, रिसर्च और स्टार्टअप यूनिवर्सिटी सहयोग को मजबूत करना होगा।