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17 अप्रैल 2026
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सरकार को ठेकेदारों का अल्टीमेटम, ‘भुगतान नहीं तो पानी नहीं’, 4500 करोड़ अटका, जल सप्लाई रोकने की चेतावनी; 5 लाख रोजगार पर संकट

सरकार को ठेकेदारों का अल्टीमेटम, ‘भुगतान नहीं तो पानी नहीं’, 4500 करोड़ अटका, जल सप्लाई रोकने की चेतावनी; 5 लाख रोजगार पर संकट
सरकार को ठेकेदारों का अल्टीमेटम, ‘भुगतान नहीं तो पानी नहीं’, 4500 करोड़ अटका, जल सप्लाई रोकने की चेतावनी; 5 लाख रोजगार पर संकट

दैनिक सम्राट संवाददादा
जयपुर
। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में पिछले 33 महीनों से 4500 करोड़ रुपए का भुगतान अटका होने को लेकर प्रदेशभर के ठेकेदार अब आर-पार के मूड में आ गए हैं। आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठेकेदारों के साथ औद्योगिक संगठनों ने सरकार को साफ और कड़ा अल्टीमेटम देते हुए ऐलान किया कि अब भुगतान नहीं तो काम नहीं के साथ रोको आंदोलन की तैयारी पूरी कर ली गई है।
प्रेस वार्ता में कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश विश्नोई ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द भुगतान नहीं किया तो प्रदेशभर में शहरों से लेकर गांवों तक पेयजल सप्लाई बाधित कर दी जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और विभाग की होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन को अब हर जिले तक फैलाया जाएगा और जरूरत पडऩे पर बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे।
वहीं प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन राजस्थान (पीएमएआर) के पूर्व अध्यक्ष सुमेर सिंह शेखावत ने ठेकेदारों का समर्थन करते हुए कहा कि भुगतान अटकने से पाइप इंडस्ट्री पर भी गंभीर असर पड़ा है। करीब 1000 करोड़ रुपए उद्योग में फंसे हुए हैं, जिससे उत्पादन और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है और इस सेक्टर से जुड़े हजारों लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि इस भुगतान संकट का असर केवल ठेकेदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि करीब 5 लाख लोगों के रोजगार पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। ठेकेदारों का कहना है कि सरकारी नियमों के अनुसार 15 दिन में भुगतान होना चाहिए, लेकिन 33 महीनों से भुगतान लंबित रहने के कारण हालात अब विस्फोटक हो चुके हैं। कई ठेकेदार कर्ज में डूब चुके हैं और मजदूरों को वेतन देना तक मुश्किल हो गया है।
ठेकेदारों ने बताया  सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं जैसे जल जीवन मिशन और ईआरसीपी (पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना) पर काम लगभग ठप हो गया है। जल भवन में ठेकेदारों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है और इसमें उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं।
ठेकेदारों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो न केवल जल आपूर्ति बाधित होगी, बल्कि आंदोलन को और तेज करते हुए प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा, जिससे औद्योगिक गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में गर्मी के इस मौसम में आम जनता को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।