आमजन खाली कुर्सियो को कैसे बताएं अपनी पीड़ा, लोगों को लगाने पड़ रहे पालिका के चक्कर
बस्सी नगर पालिका को स्थाई ईओ और कर्मचारी चाहिए
बस्सी (डी.सी.बेनिवाल)। बस्सी शहर को भले ही चतुर्थ श्रेणी नगरपालिका का दर्जा मिल गया हो, लेकिन अधिशाषी अधिकारी और अन्य कर्मचारियों को स्थाई रूप से नहीं लगाएं जाने से बस्सी के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। नगरपालिका कार्यालय में ईओ व कर्मचारियों के स्थाई रूप से नहीं बैठने से सरकार की ओर से संचालित योजनाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। बस्सी नगरपालिका में कर्मचारियों की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण आमजन को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे काम "राम भरोसे" होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
अन्य पालिकाओं का चार्ज होने से बस्सी नगरपालिका को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे कर्मचारी, अधिकतर कर्मचारी विशेषकर कानोता नगरपालिका को दे रहे महत्व
गौरतलब है बस्सी में अधिशाषी अधिकारी का दायित्व दुर्गाशंकर मोर्य को सौंपा गया है। जबकि उनके पास जमवारामगढ़ नगरपालिका का भी कार्यभार है। जिससे वे अक्सर जमवारामगढ़ नगरपालिका पर ही रहते है। कनिष्ठ सहायक पद पर कार्यरत कर्मचारी नानगराम मीना के पास बस्सी, कानोता नगरपालिका का कार्यभार है। जिससे वे अक्सर कानोता नगरपालिका पर ही समय देते हैं। सहायक लेखाधिकारी कमलेश कुमार शर्मा के पास बस्सी, वाटिका, लवाण नगरपालिका का कार्यभार है। वे भी अक्सर वाटिका और लवाण नगरपालिका में ही समय देते हैं। कनिष्ठ अभियंता रोहित मीना के पास बस्सी, कानोता का कार्यभार है। जिससे वे भी अक्सर कानोता नगरपालिका में ही समय देते हैं। इसी प्रकार सफाई निरीक्षक सुनिता बैरवा के पास बस्सी नगरपालिका ही है, फिर भी उनके चैम्बर पर हमेशा ताला लगा हुआ मिलता है। कनिष्ठ सहायक पद पर कार्यरत मुकेश कुमार मीना के पास बस्सी, कानोता नगरपालिका का कार्यभार है। लेकिन वे भी अधिकतर कानोता नगरपालिका में ही समय देते हैं। लोगो का कहना है कि इसके अलावा बस्सी नगरपालिका में लगभग 10 कर्मचारी, ठेकाकर्मी के आधार पर लगाएं हुए हैं। जो आमजन से ठीक तरीके से पेश नहीं आते हैं। सभी कर्मचारी अपनी गपशप में मशगूल रहते हैं। नगरपालिका 'राम भरोसे चलने से' कुर्सियां खाली पड़ी रहती है, जिसे देख आने-जाने वाले आमजन मायूस होकर वापस लौट जाते हैं।
ऐसे में कोई भी व्यक्ति नगरपालिका संबंधित काम करवाने आता है, तो उसे 'साहब नहीं हैं, पता नहीं कब आएंगे' आज आयेंगे या भी नहीं..? हमें नही पता..? जैसा जवाब मिलता है।

बस्सी के विकास कार्यों पर लगा विराम
कर्मचारियों के पास अन्य पालिकाओं का चार्ज होने से वे बस्सी नगरपालिका में पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। जिससे बस्सी नगर पालिका क्षेत्र के विकास को गति मिलना मुश्किल है। नगर पालिका में कामकाज के प्रति उदासीनता का सीधा असर शहर की सफाई, सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर पड़ रहा है। कर्मचारियों के समय पर ना आने से आम नागरिक परेशान हैं और नगर पालिका के प्रति विश्वास कम होता जा रहा है। बस्सी में विकास कार्यों की धीमी गति, कर्मचारियों की समय पर अनुपस्थिति और कुर्सियों के खाली रहने की खबरें अक्सर चर्चा में रहती हैं। लोगो ने पहले भी नगर पालिका के कामकाज में मनमानी और वार्डों में समस्याओं के समाधान न होने के गंभीर आरोप लगाए थे।
अधिकारी नदारद: नगरपालिका में अधिकारी और कर्मचारी नहीं मिलते, जिससे आमजन को अपनी शिकायतें दर्ज कराने में परेशानी होती है। जिससे
युवाओं द्वारा दी गई शिकायतें महीनों तक फाइलों में दबी रहती हैं और कोई कार्रवाई नहीं होती। नागरिकों को अपनी पीड़ा सुनने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिल रहा है।
समाधान की आवश्यकता:
बस्सी नगरपालिका में कर्मचारियों की तत्काल नियुक्ति की जानी चाहिए।
नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए ठोस योजना बनानी चाहिए। अधिशाषी अधिकारी (ईओ) व कर्मचारियों को नियमित रूप से कार्यालय और वार्डों में सफाई/विकास कार्यों का निरीक्षण करना चाहिए। अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि आमजन की समस्याओं का समय पर समाधान हो सके।
