नगर पालिका के पास करीब 5 लाख का सालाना टेंडर स्वीकृत, के बावजूद प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान
बस्सी (डी.सी.बेनिवाल)। शहर बस्सी में आवारा सांडों एंव लावारिस मवेशियों का आतंक लगातार बढ़ता ही जा रहा है। कस्बे के मुख्य बाजारों, चौराहों और हाईवे पर सांडों के झुंड जमा रहते हैं, जिससे हर समय हादसे का अंदेशा बना रहता है। आवारा सांड आये दिन उत्पात मचाते रहते हैं। नगरपालिका कार्यालय में शिकायतें देने के बाद भी प्रशासन द्वारा समाधान तो दूर की बात है, खानापूर्ति तक नहीं की जाती। जिससे बस्सी में आवारा सांड बेलगाम हैं। ये सांड आये दिन भीड़ में घुस जाते हैं। ओर आपस में लड़ते हैं। जिससे बाजार में अफरा-तफरी मच जाती है। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग जान बचाकर इधर-उधर भागते नजर आते हैं। इसी तरह, शहर में आवारा सांडों ने गंगाधाम कॉलोनी में घर के बाहर खड़ी दो मारूती कारों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। यह वाकया यहां सीसीटीवी कैमरो में भी कैद है। शहरवासियों द्वारा नगरपालिका कर्मचारियों को कई बार अवगत कराने के बावजूद, आवारा सांडों को पकड़कर गौशाला नहीं भिजवाया जा रहा है। शहरवासियों ने आरोप लगाया है कि बस्सी शहर में आवारा सांडो एवं लावारिस मवेशियों पर कार्यवाही नहीं की जा रही है, तो बस्सी नगरपालिका, अपने संवेदक ठेकेदार को लाखों रुपए किस बात के दे रही है। शहरवासियों का कहना है कि संवेदक, ठेकेदार और नगर पालिका कर्मचारियों की मिलीभगत से कहीं कागजों में लाखों का टेंडर जारी करके, बस्सी नगरपालिका के कर्मचारी सरकार को चपत तो नहीं लगा रहे है। शहर की प्रमुख सड़कों एंव बाजार में आवारा सांडों को देखकर प्रत्येक शहरवासी के मुख से यह सवाल उठता है कि बस्सी नगरपालिका द्वारा संवेदक, ठेकेदार को बिना काम किये पैसा क्यों दिया जा रहा है? नगरपालिका के कर्मचारियों के साथ संवेदक, ठेकेदार पर भी सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।
टेंडर के बावजूद काम नही, व्यापारियों और नागरिकों में दहशत
आवारा पशुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ने के लिए लगभग 5 लाख का टेंडर स्वीकृत होने के बावजूद, टेंडर फाइल महीनों तक आगे नहीं बढ़ पाई, जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है। सड़कों पर सांडों की लड़ाई से वाहन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और आम लोग, विशेषकर व्यापारी दहशत में हैं। क्षेत्रवासी इन आवारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए राजस्थान संपर्क के टोल फ्री नंबर 181 पर कॉल करके शिकायत भी दर्ज कराते हैं। इसके बावजूद, बस्सी शहर में कार्यवाही नहीं होना बहुत बड़ी शर्मिंदगी है। बस्सी शहर के जनप्रतिनिधियों एवं उपखण्ड प्रशासन को ऐसे मामलों में गहनता एंव प्रमुखता से जांच कर दोषी कर्मचारियों एंव संवेदक, ठेकेदार पर सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। तब ही बस्सी का विकास हो सकता है।

आवारा पशुओं को मुक्त करने के लिए शहर में विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता
बस्सी में सड़कों और नेशनल हाईवे पर आवारा पशुओं (गायों और सांडों) का झुंड गंभीर समस्या बना हुआ है। मुख्य बाजारों और हाईवे पर इनके अचानक सामने आने से आए दिन भीषण दुर्घटनाएं हो रही हैं। कई पशु मालिक अपने अनुत्पादक पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते हैं। मवेशियों के आपस में लड़ने से यातायात बाधित होने के साथ ही वाहन चालक और राहगीर घायल हो रहे हैं। हाईवे और शहर की प्रमुख सड़कों पर आवारा पशुओं के झुंड घूमते रहते हैं, जो अक्सर रात के समय हादसों का कारण बनते हैं। नगरपालिका संवेदक, ठेकेदार एंव कर्मचारियों की कमी के कारण ये मवेशी सड़कों पर ही रहने को मजबूर हैं। इस क्षेत्र में प्रशासन को जल्द ही गोवंश को गौशालाओं में स्थानांतरित करने और सड़कों को आवारा पशुओं से मुक्त करने के लिए विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता है।