नई दिल्ली। ईरान के हालिया हमलों में फारस की खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उपकरणों को पहले बताई गई तुलना में कहीं ज्यादा नुकसान हुआ है। यह जानकारी अमेरिकी अधिकारियों और मामले से जुड़े लोगों ने दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नुकसान की असली स्थिति अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है और इन ठिकानों की मरम्मत पर अरबों डॉलर खर्च होने का अनुमान है। ईरान ने 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद क्षेत्र के कई देशों में हमले किए हैं।
कई देशों में सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
इन हमलों में कम से कम सात देशों के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें गोदाम, कमांड सेंटर, विमान हैंगर और सैटेलाइट संचार से जुड़े सिस्टम शामिल हैं। इसके अलावा रनवे, रडार सिस्टम और कुछ विमानों को भी नुकसान पहुंचा है, जो सैन्य गतिविधियों और निगरानी के लिए बेहद अहम होते हैं। एक मामले में ईरान का पुराना एफ-5 लड़ाकू विमान भी अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को पार कर हमला करने में सफल रहा।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने अब तक नुकसान के पूरे आंकड़े साझा नहीं किए हैं। वहीं, इस क्षेत्र में सैन्य अभियान संभालने वाली सेंट्रल कमांड ने भी नुकसान के स्तर पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। पारदर्शिता की कमी को लेकर कुछ रिपब्लिकन सांसद नाराज हैं। उनका कहना है कि कई हफ्तों से जानकारी मांगी जा रही है, लेकिन पूरी तस्वीर सामने नहीं आ रही है।
क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ईरान में सैन्य अभियान के लिए अमेरिकी कांग्रेस से 200 अरब डॉलर से ज्यादा की मांग कर रहा है। युद्ध के पहले हफ्ते में ही अमेरिका करीब 11 अरब डॉलर खर्च कर चुका था, जबकि 2026 के लिए 838.5 अरब डॉलर का रक्षा बजट पहले ही मंजूर किया जा चुका है।