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19 मई 2026
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भारत में घरेलू कच्चे तेल का उत्पादन लगातार घट रहा, अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम जनता पर बोझ बढ़ा

भारत में घरेलू कच्चे तेल का उत्पादन लगातार घट रहा, अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम जनता पर बोझ बढ़ा
भारत में घरेलू कच्चे तेल का उत्पादन लगातार घट रहा, अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम जनता पर बोझ बढ़ा

नई दिल्ली। जब सरकार देश में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत घटाने की अपील कर रही है तो इसके पीछे एक बड़ा कारण भारत में घरेलू कच्चे तेल का लगातार घटता उत्पादन है। पिछले डेढ़ दशक से भारत का स्वदेशी कच्चा तेल उत्पादन निरंतर गिरावट पर है, जिससे विदेशी आयात पर निर्भरता बढ़ती गई है।

वर्तमान में भारत अपनी कुल कच्चे तेल जरूरत का लगभग 89 फीसद आयात करता है। जबकि दो दशक पहले विदेशी आयात पर निर्भरता सिर्फ 75 फीसद थी। ऐसे में पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में कोई भी संघर्ष, आपूर्ति बाधा या कीमतों में उछाल सीधे भारत की अर्थव्यवस्था, मुद्रास्फीति और आम जनता पर बोझ बढ़ाता है।

यह सरकार की विदेशी मुद्रा प्रबंधन की सारी गणित को उलट-पलट करती रहेगी और पूंजी खाते में घाटे पर भी इसका असर दिखता रहेगा। साथ ही पेट्रोल-डीजल की महंगाई से परिवहन, उद्योग और कृषि जैसे क्षेत्र प्रभावित होते रहेंगे।

2011-12 में भारत का घरेलू कच्चा तेल उत्पादन 3.81 करोड़ टन

पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2011-12 में भारत का घरेलू कच्चा तेल उत्पादन 38.09 मिलियन मीट्रिक टन (लगभग 3.81 करोड़ टन) था। यह लगातार घटते हुए 2020-21 में करीब 3.05 करोड़ टन रह गया, 2024-25 में 2.87 करोड़ टन व 2025-26 में 2.8 तक पहुंच गया है। यह 26-27 फीसद की गिरावट है।

असलियत में भारत का घरेलू पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन 7-8 फीसद की रफ्तार से बढ़ती इसकी इकॉनोमी के साथ कभी कदमताल बैठा ही नहीं सका। इस गिरावट में कहने की जरूरत नहीं कि देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी ओएनजीसी का योगदान है, जो देश के कुल घरेलू उत्पादन का लगभग 60-70 फीसद हिस्सा पैदा करता है।

2025-26 में भी कुल उत्पादन गिरावट पर रहा

2011-12 में ओएनजीसी का उत्पादन करीब 2.37 करोड़ टन था, जो घटकर हाल के वर्षों में 1.68-2.09 करोड़ टन के आसपास रह गया है। पुराने होते तेल फील्जों में प्राकृतिक तौर पर उत्पादन में कमी होने, प्रमुख व बड़े खोजों की कमी और परियोजनाओं में देरी मुख्य कारण हैं।

सरकार और ओएनजीसी ने पहले कई बार दावा किया था कि नए प्रोजेक्ट्स से उत्पादन बढ़ेगा, लेकिन 2025-26 में भी कुल उत्पादन गिरावट पर रहा। एनजीसी ने 2024 में केजी बेसिन के (डीडब्लूएन-98/2) ब्लाक में तेल उत्पादन शुरू करने के समय दावा किया था कि अब क्रूड उत्पादन तेजी से बढ़ेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

2025-26 के दौरान भारत में कच्चे तेल की खपत बढ़ी

दूसरी तरफ, 2011-12 से 2025-26 के दौरान भारत में कच्चे तेल की खपत में काफी बढ़ी है। 2011-12 में कुल पेट्रोलियम उत्पादों की खपत लगभग 20.4 करोड़ टन के आसपास थी, जो 2024-25 में 26.77 करोड़ टन तक पहुंच गई थी। इसकी व जह से आयात निर्भरता 77 फीसद से बढ़कर 88.6 फीसद तक पहुंच गई है। स्थिति यह है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड आयल आयातक देश बन गया है।

ऐसा नहीं है कि केंद्र सरकार ने घरेलू कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम नहीं उठाये हैं। हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (एचईएलपी), ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (ओएएलपी), डिस्कवर्ड स्माल फील्ड्स पॉलिसी और प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (पीएससी) में सुधार शामिल हैं।

सरकार ने सरकारी कंपनियों को अधिक स्वायत्तता दी

सरकार ने ओएनजीसी, ओआइएल जैसी सरकारी कंपनियों को अधिक स्वायत्तता दी, निजी व विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया, रायल्टी रेट्स कम किए और ई-बिडिंग जैसी सुविधाएं शुरू कीं।

ओएनजीसी ने पुराने फील्डों को नये सिरे से पुनर्विकसित कनरे , नए खोजे गये फील्जों में तेजी से उत्पादन शुरू करने, डीपवाटर एक्सप्लोरेशन और खोजे गये फील्डों से अधिकतम निकासी जैसे अभियान चलाए हैं। इन प्रयासों के बावजूद कुल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हो सकी है। इस मुद्दे पर संसदीय समितियों ने भी कई बार चिंता जताई है।