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19 मई 2026
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मई माह में ही झुलसा देने वाली गर्मी, लेकिन बारिश भी हो रही, आखिर क्यों हो रहा है बार-बार मौसम परिवर्तन

मई माह में ही झुलसा देने वाली गर्मी, लेकिन बारिश भी हो रही, आखिर क्यों हो रहा है बार-बार मौसम परिवर्तन
मई माह में ही झुलसा देने वाली गर्मी, लेकिन बारिश भी हो रही, आखिर क्यों हो रहा है बार-बार मौसम परिवर्तन

नई दिल्ली। हाल के दिनों में, दिल्ली में मौसम में आए अचानक बदलावों ने शहर के निवासियों को हैरान कर दिया है। यह तेजी से आया बदलाव एक पल में झुलसा देने वाली गर्मी और उसके कुछ ही घंटों बाद तेज हवाएं और हल्की बारिश महज एक इत्तेफाक नहीं है। बल्कि, मौसम का यह "दोहरा मिजाज" उत्तरी भारत में बहने वाली नमी से भरी हवाओं और लगातार बढ़ते तापमान के बीच चल रही जोरदार खींचतान का नतीजा है।

पूरे हफ्ते शहर में भीषण गर्मी की मार

हालांकि, मौसम के इन उतार-चढ़ावों के बीच, दिल्ली में अब गर्मियों की तपिश बढ़ने लगी है। उम्मीद है कि पूरे हफ्ते शहर को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा और तापमान भी तेजी से बढ़ने की संभावना है। दूसरी ओर, दिल्ली की हवा की गुणवत्ता (AQI) फिलहाल 'मध्यम' श्रेणी में बनी हुई है।

सोमवार को, दिल्ली में न्यूनतम तापमान 26.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन का तापमान 44 डिग्री के आस-पास रहने की उम्मीद है। पूरे दिन आसमान साफ़ रहेगा और तेज धूप खिली रहेगी।

  • साफ आसमान और सौर विकिरण की मार: सुबह की तेज गर्मी का सबसे बड़ा कारण आसमान में बादलों का न होना है। दिल्ली की कंक्रीट और डामर की सतहें इस गर्मी को तेजी से सोख लेती हैं। नतीजतन दोपहर से पहले ही तापमान 35 डिग्री तक पहुंच जाता है। साफ आसमान सीधे सूर्य की किरणों को जमीन तक पहुंचने देता है, जिससे शहर जल्दी ही तपने लगता है।
  • पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय आगमन: शाम को अचानक छाने वाले बादल पश्चिमी विक्षोभ की देन हैं। यह निम्न दबाव प्रणाली उत्तरी ईरान और कैस्पियन सागर के रास्ते हिमालय की ओर बढ़ रही है। दोपहर तक इसका अग्र भाग दिल्ली-एनसीआर पहुंच जाता है। यह प्रणाली नमी की एक मोटी चादर की तरह फैलती है, सूरज को ढक लेती है और चमकदार नीला आसमान कुछ ही घंटों में भारी बादलों से भर जाता है।
  • संवहन और गर्म हवा का ऊपर उठना: सुबह की तीव्र गर्मी शाम के मौसम बदलाव को ऊर्जा देती है। गर्म जमीन के ऊपर की हवा हल्की होकर तेजी से ऊपर उठती है। इसे संवहन कहते हैं। जब यह गर्म हवा ऊंचाई पर पश्चिमी विक्षोभ की ठंडी और नम हवा से टकराती है, तो घने बादल बनते हैं। नतीजतन रात में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बढ़ जाती है।
  • राजस्थान का चक्रवाती प्रभाव: उत्तर-पश्चिम राजस्थान के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण ने भी इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई। सुबह यह प्रणाली रेगिस्तानी गर्म और शुष्क हवाओं को दिल्ली भेजती है, जिससे तापमान चढ़ता है। लेकिन शाम तक दबाव में बदलाव के कारण अरब सागर से नमी भरी हवाएं आने लगती हैं। शुष्क गर्मी उमस और बादलों में बदल जाती है।

हीट स्ट्रोक के कौन से लक्षण खतरे की घंटी माने जाते हैं?

हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है। तेज सिरदर्द, अत्यधिक प्यास लगना, चक्कर आना, शरीर में कमजोरी, तेज बुखार, उल्टी और बेहोशी इसके प्रमुख संकेत हैं। कई बार मरीज का शरीर बहुत गर्म हो जाता है, लेकिन पसीना आना बंद हो जाता है।

ऐसी स्थिति खतरनाक हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत उसे ठंडी जगह पर ले जाएं, पानी पिलाएं और डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज नहीं मिलने पर हीट स्ट्रोक जानलेवा भी साबित हो सकता है।

बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए अभिभावकों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

बच्चों को दोपहर के समय बाहर खेलने न भेजें। उन्हें बार-बार पानी, नींबू पानी, छाछ और ओआरएस जैसे तरल पदार्थ देते रहें। हल्के और सूती कपड़े पहनाएं, ताकि शरीर का तापमान संतुलित रहे। बाहर का जंक फूड और बासी खाना देने से बचें। यदि बच्चा सुस्त दिखाई दे, बार-बार उल्टी करे या तेज बुखार हो तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें। गर्मी में बच्चों की देखभाल में लापरवाही गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।

बुजुर्गों के लिए गर्मी का मौसम कितना खतरनाक है?

उम्र बढ़ने के साथ शरीर की पानी संतुलित रखने की क्षमता कम हो जाती है। कई बुजुर्ग पहले से बीपी, शुगर और हृदय रोग जैसी समस्याओं से जूझ रहे होते हैं। तेज गर्मी में उन्हें चक्कर, सांस लेने में परेशानी और डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक रहता है। इसलिए बुजुर्गों को दोपहर 12 बजे से चार बजे के बीच तेज धूप में निकलने से बचाना चाहिए। समय पर दवाएं, पर्याप्त पानी और हल्का भोजन जरूरी है। परिवार के लोगों को उनकी नियमित निगरानी करनी चाहिए, ताकि कोई गंभीर स्थिति न बने।

गर्भवती महिलाओं के लिए बढ़ती गर्मी कितनी खतरनाक साबित हो सकती है?

गर्भवती महिलाओं के लिए गर्मी का मौसम काफी संवेदनशील होता है। शरीर में पानी की कमी होने पर कमजोरी, चक्कर, ब्लड प्रेशर असंतुलन और समयपूर्व प्रसव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। तेज गर्मी मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों को प्रभावित करती है। लंबे समय तक धूप में रहने या पर्याप्त पानी न पीने से जोखिम बढ़ जाता है। गर्भवती महिलाओं को दिनभर में पर्याप्त तरल पदार्थ लेना चाहिए और भीड़-भाड़ व गर्म वातावरण से बचना चाहिए। यदि उल्टी, सिरदर्द या बेचैनी महसूस हो तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

हीट वेव से नवजात बच्चों के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकती है?

नवजात बच्चों का शरीर तापमान नियंत्रित करने में सक्षम नहीं होता, इसलिए वे गर्मी से जल्दी प्रभावित होते हैं। अधिक तापमान में बच्चों को डिहाइड्रेशन, बुखार और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। कई बार माता-पिता अनजाने में बच्चों को ज्यादा कपड़े पहना देते हैं, जिससे शरीर का तापमान और बढ़ जाता है। बच्चों को ठंडे और हवादार वातावरण में रखना चाहिए। मां का दूध सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, क्योंकि इससे शरीर में पानी और पोषण दोनों मिलते हैं। यदि बच्चा सुस्त हो जाए या दूध कम पिए तो तुरंत डाक्टर को दिखाएं।

गर्मी में खानपान को लेकर लोग क्या गलतियां कर रहे हैं?

गर्मी में बाहर का खुला और बासी खाना सबसे बड़ा खतरा बनता है, लेकिन लोग इसे नजरअंदाज कर रहे हैं। सड़क किनारे मिलने वाले कटे फल और दूषित पानी से संक्रमण तेजी से फैलता है। लोग पानी कम पीते हैं और तला-भुना भोजन अधिक खाते हैं, जिससे शरीर में गर्मी और बढ़ती है। गर्मी में हल्का और ताजा भोजन करना चाहिए। नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और ओआरएस का सेवन फायदेमंद है। साफ पानी पीना और हाथों की स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी है।