नई दिल्ली। बिहार की राजनीति बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद राज्य में सत्ता की कमान स्थानांतरित होने वाली है।
हिंदी पट्टी के इस राज्य में पहली बार भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार का गठन होगा। पार्टी के शीर्ष स्तर पर इसकी रूपरेखा लगभग तैयार कर ली गई है और 15 अप्रैल को नई सरकार के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जो नीतीश कुमार सरकार में अभी उपमुख्यमंत्री हैं।
भाजपा का प्रयास है कि लोकसभा-विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण से संबंधित नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को पार्लियामेंट में लाने के पहले बिहार में सत्ता परिवर्तन का अध्याय पूरा कर लिया जाए।
भाजपा के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक बिहार में होने वाले इस बदलाव को बड़े राजनीतिक आयोजन के रूप में पेश करना चाहती है। इसलिए शपथ ग्रहण समारोह को भव्य बनाने की तैयारी है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और स्वयं नीतीश कुमार की मौजूदगी की संभावना है।
दिल्ली में पार्टी नेतृत्व लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। नीतीश कुमार नौ अप्रैल को दिल्ली पहुंचेंगे और 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके बाद बिहार की सत्ता को लेकर चल रही अटकलों पर औपचारिक विराम लग जाएगा।
सम्राट चौधरी को मिल सकती है बिहार की कमान
इस बीच भाजपा के भीतर नए मुख्यमंत्री को लेकर कई नामों पर चर्चा रही है, लेकिन सम्राट चौधरी शुरुआत से ही सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। सम्राट चौधरी का राजनीतिक ग्राफ पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। उन्हें संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर लगातार अहम जिम्मेदारियां दी जाती रही हैं। पहले उन्हें बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार में उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।
हालिया लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने प्रदेश भाजपा की कमान संभाली। चुनाव के बाद जब फिर से एनडीए सरकार बनी तो उन्हें दोबारा डिप्टी सीएम बनाया गया। साथ में गृह विभाग की भी जिम्मेदारी भी दी गई। यह भी उल्लेखनीय है कि बिहार में लंबे समय बाद ऐसा हुआ जब मुख्यमंत्री के अलावा किसी अन्य नेता को गृह मंत्रालय सौंपा गया। इससे संगठन और नेतृत्व में उनकी स्वीकार्यता का संकेत मिलता है।
हाल ही में बंगाल चुनाव के लिए भाजपा के स्टार प्रचारकों की सूची में भी उनका नाम प्रमुखता से शामिल किया गया। इस सूची में बिहार से चुनिंदा नेताओं को ही जगह मिली है, जिनमें नितिन नवीन और मंगल पांडेय के साथ सम्राट चौधरी का नाम शामिल है। मंगल पांडेय बंगाल के प्रभारी भी हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछड़े वर्गों के बीच सम्राट चौधरी की मजबूत पकड़ भाजपा की रणनीति का अहम हिस्सा है। साथ ही जदयू के साथ गठबंधन सरकार चलाने काम उनका अनुभव भी उन्हें अन्य दावेदारों से आगे करता है।
हालांकि, भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पार्टी ने पिछले कुछ वर्षों में कई बार चौंकाने वाले फैसले लिए हैं, इसलिए अंतिम घोषणा तक सभी संभावनाएं खुली मानी जा रही हैं। इसके बावजूद मौजूदा संकेत साफ बताते हैं कि बिहार में सत्ता परिवर्तन अब सिर्फ औपचारिकता भर रह गया है।