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29 मई 2026
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शायर बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में निधन

शायर बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में निधन
शायर बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में निधन

भोपाल। उर्दू गजल के शहंशाह डॉ. बशीर बद्र (91) नहीं रहे। उन्होंने गुरुवार दोपहर 12:15 बजे भोपाल में फानी दुनिया को अलविदा कहा। उर्दू अदब की रूह में समाए बशीर बद्र तकरीबन 14 बरस डिमेंशिया की गिरफ्त में रहे, जिससे उनकी याददाश्त कमजोर होती चली गई, मगर उनके शेर आज भी दिलों में धडक़ते हैं। उनको शाम 7:30 बजे भोपाल टॉकीज के पास कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक किया गया।
उनकी पत्नी, डॉ. राहत बद्र, जब उनके शेर गुनगुनातीं, तो बशीर साहब के चेहरे पर शादाबी की हल्की सी झलक उभर आती थी। कभी-कभी वे खुद भी मिसरा पूरा करने लगते। एक वक्त  था, जब उनके बिना मुशायरे अधूरे माने जाते थे। उनकी मौजूदगी महफिल की कामयाबी की जमानत हुआ करती थी। जब भी उन्हें मुशायरे की याद आती थी तो इरशाद, इरशाद कहने लगते थे।
गजल जागती रही, मैं सो गया- अशोक मिजाज बद्र
सागर के शायर अशोक मिजाज बद्र ने बताया- बशीर बद्र से उनका रिश्ता करीब 34 साल पुराना था। 14 फरवरी 1992 से उन्होंने मुझे अपने साथ रखा। शागिर्द बनाया, लेकिन सच में बेटे की तरह रखा। भावुक होते हुए उन्होंने उनका एक शेर याद किया- मैं जागता रहा तो गजल जागती रही, मैं सो गया तो साथ मेरे सो गई। यही शेर तुम्हारी पहचान बनेगा, डरना मत।