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3 अप्रैल 2026
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सरकार 15 अप्रैल तक कराए पंचायत व निकाय चुनाव- डोटासरा

सरकार 15 अप्रैल तक कराए पंचायत व निकाय चुनाव- डोटासरा
सरकार 15 अप्रैल तक कराए पंचायत व निकाय चुनाव- डोटासरा

हाईकोर्ट आदेशों की अनदेखी कर रही सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार की मंशा खराब 

दैनिक सम्राट संवाददाता
ब्यावर।
ओबीसी आयोग को लेकर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए आयोग को बर्खास्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार की मंशा ठीक नहीं है और हाईकोर्ट के आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
ब्यावर में गुरुवार को संगठन बढ़ाओ लोकतंत्र बचाओ अभियान अभियान के तहत पीसीसी चीफ डोटासरा ने विशाल जनसभा को संबोधित किया। डोटासरा ने निकाय और पंचायत चुनाव तय समय पर नहीं करवाने पर राजस्थान हाईकोर्ट के अवमानना नोटिस को लेकर सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और ओबीसी आयोग पर निशाना साधा है।
15 अप्रैल 2026 तक कराए पंचायत व निकाय चुनाव: डोटासरा ने कहा- अगर ओबीसी आयोग करीब एक साल में भी सर्वे रिपोर्ट न दे सके, तो ऐसे आयोग को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करना चाहिए। भाजपा सरकार ने चुनाव नहीं करवाने का तय कर रखा है इसलिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का बहाना बनाया।
डोटासरा ने कहा- हाईकोर्ट कोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को स्पष्ट आदेश दे दिए थे कि 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत व निकाय चुनाव कराए जाएं। भाजपा सरकार और निर्वाचन आयोग की मंशा देखिए। एक तरफ कोर्ट ने 15 अप्रैल तक डेडलाइन दी और दूसरी तरफ ये लोग 22 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी करने का कार्यक्रम बना रहे हैं।
हाईकोर्ट ने सरकार से चुनाव नहीं कराने को लेकर जवाब मांगा: डोटासरा ने कहा- अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए भाजपा सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से बार-बार पंचायत और निकाय चुनाव टालने पर जवाब तलब किया और स्पष्ट आदेश के बावजूद 15 अप्रैल तक चुनाव नहीं कराने की मंशा पर तल्खी से जवाब मांगा है।
कोर्ट के निर्देश के बावजूद चुनाव नहीं करवा रही भाजपा सरकार: डोटासरा ने कहा- इतना ही नहीं जब भाजपा सरकार लोकतंत्र की हत्या पर आमादा है, ऊपर से पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर हास्यास्पद बयान देकर बचने की कोशिश कर रहे हैं कि कांग्रेस ने भी चुनाव नहीं कराए। शायद मंत्रीजी को इसकी जानकारी नहीं है कि पंचायतीराज और नगर निकायों को संवैधानिक दर्जा कब मिला।
1993 में 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधनों के बाद स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा मिला और हर 5 साल में चुनाव कराना अनिवार्य हुआ। इसके बाद राजस्थान में कभी चुनाव टालने की परंपरा नहीं रही। केवल असाधारण परिस्थितियों जैसे कोरोना में ही सीमित देरी हुई, वो भी सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से। जबकि आज हालात इसके उलट हैं, आज कोर्ट निर्देश दे रहा है, फिर भी भाजपा सरकार चुनाव नहीं करवा रही है।
राजस्थान में संविधान सर्वोच्च है या भाजपा सरकार की मनमानी?: डोटासरा ने कहा- पहले वन स्टेट-वन इलेक्शन के नाम पर, फिर परिसीमन का बहाना, उसके बाद ओबीसी प्रतिनिधित्व देने के लिए ट्रिपल टेस्ट की सर्वे प्रक्रिया अधूरी रखना। बार-बार आयोग का कार्यकाल बढ़ाकर सितंबर तक करना और अब 22 अप्रैल तक वोटर लिस्ट जारी करने का कार्यक्रम तय करके भाजपा सरकार कोर्ट की चुनाव कराने की तय समयसीमा को टाल रही है।
असलियत ये है कि भाजपा सरकार को चुनाव कराने से ज्यादा डर चुनाव परिणाम में हार और उसके बाद पर्ची बदलने का है। सवाल सीधा है,राजस्थान में संविधान सर्वोच्च है, या भाजपा सरकार की मनमानी? अगर अदालत के आदेशों का भी पालन नहीं होगा, तो फिर लोकतंत्र का क्या अर्थ रह जाएगा? जनसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, जिला अध्यक्ष किशोर चौधरी, विधायकगण और पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए।