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31 मई 2026
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देश में घरेलू हिंसा दर घटी,18.8  प्रतिशत महिलाओं के पास जमीन का मालिकाना हक

देश में घरेलू हिंसा दर घटी,18.8  प्रतिशत महिलाओं के पास जमीन का मालिकाना हक
देश में घरेलू हिंसा दर घटी,18.8  प्रतिशत महिलाओं के पास जमीन का मालिकाना हक

एनएफएचएस की रिपोर्ट में खुलासा

दैनिक सम्राट संवाददाता
नई दिल्ली।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2023-24 (एनएफएचएस-6) की रिपोर्ट जारी हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं में मोटापा साल 2019-21 के मुकाबले 7 प्रतिशत बढ़ गया। देश में घरेलू हिंसा की दर 29.2 प्रतिशत से घटकर 22.3 प्रतिशत पर आ गई है। वहीं, बाल विवाह का कुल आंकड़ा 23.3 प्रतिशत से घटकर 20.1 प्रतिशत रह गया है। कामकाजी महिलाएं 30.8 प्रतिशत तक पहुंच गईं, जो पहले 25.4 प्रतिशत थीं।
वहीं, निजी अस्पतालों में होने वाली सिजेरियन डिलीवरी 54.1 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर है। शुरुआती 6 महीनों तक शिशुओं को ‘केवल स्तनपान’ कराने की दर 63.7 प्रतिशत से गिरकर 55.8 प्रतिशत पर आ गई है।
98.3 प्रतिशत घरों में बिजली और 96.5 प्रतिशत घरों में साफ पानी पहुंच चुका है। महिलाओं में इंटरनेट का उपयोग दोगुना होकर 64.3 प्रतिशत पर पहुंच गया है।
18.8 प्रतिशत महिलाओं के पास जमीन का मालिकाना हक
देश में अब कुल 18.8 प्रतिशत परिवारों में महिलाओं के पास मकान या जमीन का मालिकाना हक है। शहरों में 18.2 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 19.1 प्रतिशत। जबकि पिछले (2021) सर्वे में यह केवल 14.0 प्रतिशत था।
लेकिन परिवार नियोजन के आधुनिक तरीके (जैसे गोली, कंडोम, नसबंदी) अपनाने वाली महिलाओं की संख्या में गिरावट आई है और यह पिछले सर्वे के 56.4 प्रतिशत से घटकर अब कुल 52.7 प्रतिशत रह गई हैं।
कुपोषित बच्चों में बच्चों में नाटापन घटा
2021 के सर्वे में कुपोषित बच्चों में नाटेपन का आंकड़ा 35.5 प्रतिशत था, जो अब घटकर 29.3 प्रतिशत पर आ गया है। बच्चों की लंबाई में आया यह 6.2 प्रतिशत अंकों का सुधार एक बहुत बड़ी और सकारात्मक राहत है। 6 महीने से 2 साल तक के केवल 15.3 प्रतिशत बच्चों को सही और संतुलित खाना मिल पा रहा है। यानी 85 प्रतिशत बच्चों को जरूरी पोषण नहीं मिल रहा।
बिहार में वैवाहिक हिंसा सबसे ज्यादा
बाल विवाह में केरलम 2.9 प्रतिशत मामलों के साथ सबसे सुरक्षित राज्य है, जबकि पश्चिम बंगाल (36.4 प्रतिशत) और बिहार (34.6 प्रतिशत) में इसके सबसे अधिक मामले हैं। वैवाहिक हिंसा के मामले में हिमाचल प्रदेश 4.3 प्रतिशत के साथ सबसे सुरक्षित है, जबकि बिहार में स्थिति सबसे खराब है जहां 36.1 प्रतिशत महिलाओं को इसका सामना करना पड़ता है।
वहीं मोटापे की समस्या आंध्र प्रदेश (48 प्रतिशत), सिक्रिम (48 प्रतिशत) और केरलम (46.7 प्रतिशत) की महिलाओं में सबसे ज्यादा है, जबकि मेघालय (13.8 प्रतिशत) और झारखंड (16.9 प्रतिशत) में यह समस्या सबसे कम पाई गई है।
भारत में 30 प्रतिशत महिलाओं ने पार्टनर से हिंसा झेली
वल्र्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करीब 30 प्रतिशत महिलाएं इंटीमेट पार्टनर वॉयलेंस का शिकार हुई हैं। यानी कि उनके पति या पार्टनर के जरिए मानसिक, आर्थिक और यौन हिंसा की गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि 15 से 49 एज ग्रुप की हर पांचवीं महिला इससे पीडि़त है। वहीं दुनिया में करीब 84 करोड़ महिलाओं ने अपनी जिंदगी में कभी न कभी पार्टनर की तरफ से सेक्शुअल एब्यूज झेला है।
साल 2000 के बाद से यह आंकड़ा मुश्किल से ही बदला है। अगर नॉन-पार्टनर की बात की जाए तो दुनिया भर में 15-49 साल की उम्र की 8.4 परसेंट महिलाओं को किसी ऐसे व्यक्ति से सेक्शुअल हिंसा का सामना करना पड़ा है जो पार्टनर नहीं है। वहीं भारत में 15 साल और उससे ज्यादा उम्र की लगभग चार परसेंट महिलाओं के साथ किसी ऐसे व्यक्ति ने यौन हिंसा की है जो उनका पार्टनर नहीं है।